मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

आज़ादी की लड़ाई जहां मुस्लिम धार्मिक विद्वानों और उलेमाओं का महत्वपूर्ण योगदान है, वहीं देश के अनेक मदरसों ने भी आज़ादी की लड़ाई में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया है। और यह परंपरा आज भी जारी है। इसी क्रम में लोहार मंडी स्थित प्रतिष्ठित धार्मिक संस्थान मदरसा जामिया अशरफिया इज़हार उल उलूम जिसे मरकज़ ए अहले सुन्नत के नाम से भारत सहित देश विदेश में जाना पहचाना जाता है, में जश्न ए यौम ए आज़ादी (स्वतंत्रता दिवस 2025 ) का पर्व देशभक्ति की भावना के साथ मनाया गया।
इस कार्यक्रम में संस्थान के प्रबंध संचालक पीरे तरीक़त अलहाज मौलाना अहमद अशरफ़ अशरफी, सद्रुल-मुदर्रिसीन मुफ़्ती क़मरुल हुदा नईमी, मुफ़्ती इब्नुल हसन साहब, युवा धार्मिक विद्वान मौलाना हसनैन अशरफ़ जामेई, हाफ़िज़ सद्दाम साहब, हाफ़िज़ नदीम साहब, मौलाना ओवैस साहब ने शिरकत की तथा जामिया अशरफ़िया और बेसिक इस्लामिक स्टडीज़ के सभी छात्र उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राष्ट्रगान (क़ौमी तराना) पढ़ा गया झंडा वंदन किया गया। आखिर में मुल्क की उन्नति और खुशहाली के लिए दुआ-ए-ख़ैर की गई। बच्चों में चॉकलेट बांटी गई। कार्यक्रम में सबसे उल्लेखनीय और सराहनीय बात यह रही कि एक छात्र ने अंग्रेज़ी में अपना भाषण दिया और एक छात्र ने उर्दू में भाषण दिया।
