अंकित तिवारी, ब्यूरो चीफ, प्रयागराज (यूपी), NIT:

अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला एसोसिएशन (ऐपवा) के राज्यव्यापी आह्वान पर प्रयागराज जिला मुख्यालय पर मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी प्रतिनिधि को सौंपा गया। ज्ञापन सौंपने के दौरान ऐपवा नेता सोनाली ने कहा कि उत्तर-प्रदेश में महिलाओं के ऊपर हिंसा लगातार बढ़ती जा रही है खुद सरकारी आंकड़े इसके गवाही दे रहे हैं। महिला अपराध के मामले में यूपी शर्मनाक ढंग से ऊपर है। प्रदेश के लगभग हर जिले से महिलाओं के साथ बलात्कार, हत्या, अपहरण और सांप्रदायिक हिंसा की घटनाएं हर रोज की ख़बर बनती जा रही है। कई घटनाओं में तो अपराधियों और बलात्कारियों को कड़ी सजा के बजाय संरक्षण मिल रहा है।
महिलाओं को इन घटनाओं में न्याय तक नहीं मिल पा रहा है। कई मामलों में तो पुलिस थानों में महिला हिंसा की घटनाओं की एफआईआर तक दर्ज नहीं करती और पीड़िता के प्रति यूपी पुलिस का रवैया भी जेंडर संवेदनशील नहीं होता। महिलाओं के न्याय की बात दूर की कौड़ी साबित हों रही है। महिला उत्पीड़न की तमाम घटनाओं में राज्य महिला आयोग की चुप्पी बताती है की महिला आयेगी की अपनी कोई भूमिका नहीं रहा गई है। उत्तर प्रदेश में महिलाएं महंगाई, कर्ज, बेरोजगारी की मार झेलने के लिए विवश हो रही हैं , आपकी स्मार्ट परियोजनाएं ग़रीब परिवारों को चैन छीन रही हैं। हाल में सरकार ने प्रदेश में 5000 स्कूलों का मर्जर का आदेश दिया है। सरकारी स्कूल पर तालाबंदी से सबसे पहले लड़कियों की शिक्षा प्रभावित होगी।
उन्होंने मांग किया कि उत्तर प्रदेश में बदस्तूर जारी महिलाओं के साथ हिंसा, बलात्कार की घटनाओं पर रोक लगाओ। महिला हिंसा की किसी भी घटना की यदि थाने में एफआईआर दर्ज नहीं की जाती है और अपराधियों की गिरफ्तारी नहीं होती है, तो संबंधित पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए, प्रदेश में 5000 स्कूलों के मर्जर का आदेश ग्रामीण गरीबों को शिक्षा से वंचित कर देगा। सरकारी स्कूलों में तालाबंदी और सरकारी शिक्षा के दरवाजे बंद होने से लड़कियों की शिक्षा सबसे अधिक प्रभावित होगी। हम मांग करते है की सरकार इस आदेश को तत्काल वापस ले।
सस्ती समान शिक्षा प्रणाली की गारंटी की जाए और शिक्षा के निजीकरण पर रोक लगाई जाए, 29 जून 2025 को करछना प्रयागराज में हुई घटना के दौरान गिरफ्तार दलित आदिवासी नौजवानों को बिना शर्त रिहा किया जाए और घटना के असली दोषियों पर कार्रवाई की जाए, सभी स्कीम वर्कर्स (आशा, आंगनबाड़ी, रसोइयों) को राज्यकर्मी घोषित किया जाए, उनके पुराने बकाया वेतन का भुगतान शीघ्र किया जाए, कार्यस्थल पर सुरक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट के नियमानुसार यौन हिंसा के खिलाफ शिकायत कमेटी का गठन किया जाए, माइक्रोफाइनेंस के सभी कर्जे माफ किए जाएं।
आर. बी .आई गाइड लाइन को कड़ाई से लागू किया जाए सहारा फाइनेंस समेत सभी चिट फंड कम्पनियों में जमा गरिबों का पैसा सूद समेत वापस किया जाए, महिलाओं को कर्ज देने के लिए सरकार द्वारा संचालित स्वयं सहायता समूहों को पुनर्जीवित किया जाए और हर महिला के लिए सम्मानजनक रोजगार और कार्यस्थल की गारंटी की जाए, गरीबों के पुराने बिजली बिल माफ किया जाए, दो सौ यूनिट बिजली फ्री हो, स्मार्ट मीटर लगाना बंद कर बिजली विभाग के भ्रष्टाचार पर रोक लगाई जाए ,बिजली का निजीकरण बंद कर फर्जी मीटर रीडिंग पर रोक लगाई जाए, महंगाई पर रोक लगाई जाए, रसोई गैस के दाम 500 रुपए फिक्स किए जाएं।
सार्वजनिक वितरण प्रणाली में राशनिंग व्यवस्था के तहत हर गरीब परिवार को 50 किलो अनाज, तेल व अन्य उपयोगी खाद्य पदार्थों को देने की गारंटी की जाए, प्रदेश में महिला उत्पीड़न की बढ़ती तमाम घटनाओं में राज्य महिला आयोग की चुप्पी ने आयोग की भूमिका पर कई सवाल खड़े किए हैं। ज्ञापन के दौरान सुनील मौर्य,भानु, एड.प्रमोद भारतिया, एड. डी के चौधरी शामिल रहे।
