परमहंसी गंगा आश्रम से पीयूष मिश्रा के साथ अश्वनी मिश्रा की विशेष रिपोर्ट-:
सिवनी (मप्र), NIT;
आज पूज्य ज्योतिष्पीठाधीश्वर एवं द्वारका शारदापीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी श्री स्वरूपानन्द सरस्वती जी महाराज ने अपने 71 दण्ड दीक्षा दिवस पर अपनी पावन तपोभूमि परमहंसी गंगा आश्रम में सनातन धर्मावलंबियों के मध्य प्रवचन में संन्यास धर्म की एवं संन्यासी की व्याख्या करते हुऐ बतलाया कि संन्यासी समस्त विश्व को अभय दान देने के लिये दण्ड धारण करते हैं।
आदि शंकराचार्य जी के संन्यास स्थल विवाद पर बोलते हुये पूज्यपाद महाराज श्री ने कहा नर्मदा के उत्तर तट पर नरसिंहपुर जिले में सांकलघाट में आदि गुरू शंकराचार्य जी का संन्यास स्थल है जो कि गोविन्दनाथ वन स्थित एक अत्यंत प्राचीन गुफा में है।वर्तमान मुख्यमंत्री जी तथ्यों की अनदेखी कर ओंकारेश्वर में शंकराचार्य जी का संन्यास स्थल प्रचारित कर रहे हैं । जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है। नरसिंहपुर गजेडीयर और शंकर दिग्विजय जैसे विभिन्न ग्रंथों में यह प्रमाणित है कि शंकराचार्य जी का संन्यास स्थल नरसिंहपुर के पास नर्मदा के उत्तर तट पर गोविन्दनाथ वन स्थित हजारों वर्ष प्राचीन गुफा ही उनका संन्यास स्थल है। वर्तमान सरकार तथ्यों से छेड़छाड़ कर सनातन धर्म एवं जनमानस को भ्रमित कर रही है ,उक्त यात्रा के संदर्भ में पूज्यपाद महाराज श्री ने कहा कि एकात्म यात्रा पूरी तरह से राजनैतिक है, यात्रा में सनातन धर्म के संस्थापक,स्थापक, संरक्षक भगवत्पाद श्रीमदाद्य शंकराचार्य जी द्वारा स्थापित चार पीठों में से एक भी शंकराचार्य प्रतिनिधि,शिष्य, या मठाधीश का समर्थन नही है,और अनभिज्ञ लोग यात्रा में सम्मिलित होकर धार्मिक जनमानस एवम सनातन धर्मियों को आद्य शंकराचार्य जी के जन्म स्थल,सन्यास दीक्षा स्थली को लेकर भ्रम फैला रहे है,जो अनुचित है।
