पाप कर्म करने वाले को भी निश्चित दण्ड मिलता है: पंडित राजेश अग्निहोत्री भागवताचार्य | New India Times

पवन परूथी, ग्वालियर (मप्र), NIT:

पाप कर्म करने वाले को भी निश्चित दण्ड मिलता है: पंडित राजेश अग्निहोत्री भागवताचार्य | New India Times

कल चर्चा चल रही थी कि कर्मों का फल अवश्य मिलता है। कुछ लोगों की शिकायत रहती है कि जो अच्छे कर्म करने वाला है, धर्म के रास्ते पर चलने वाला है, सबकी सहायता करता है, पूजा पाठ करता है और दान पुण्य भी करता है फिर भी वह परेशान रहता है। और जो पाप कर्म में लगा हुआ है, अधर्म करता है, बेईमानी करता है, दिन रात गलत कर्मों में लिप्त रहता है फिर भी वह तो खूब मजे में रहता है। लेकिन वास्तव में ऐसा है नहीं, क्योंकि जो जितना अधिक काम करता है उसको उतनी ही अधिक मजदूरी मिलती है।इस बात को इस तरह से समझना चाहिए। एक गांव में एक जमींदार रहता है और एक मजदूर। मजदूर को अपने घर के लिए मिर्च मसाले तेल साबुन आदि लाना था, उसने एक बोरी में तीस चालीस किलो अनाज भरा और चल दिया शहर में बेचने के लिए।

शहर में एक तो अनाज मंडी होती है जिसमें बड़े बड़े व्यापारियों की दुकानें होती हैं उन दुकानों को आढ़त कहा जाता है और व्यापारी को आढ़तिया कहा जाता है । मंडी के बाहर छोटे छोटे दुकानदार नीचे जमीन पर बैठकर ही अनाज खरीदते हैं।अब वो मजदूर चालीस किलो गेहूं लेकर बड़े व्यापारी के पास तो जाएगा नहीं,वो नीचे बैठे हुए छोटे दुकानदार को ही अपना अनाज बेच दिया ,अनाज बेचने और पेमेंट मिलने में उस मजदूर को तनिक भी देरी नहीं लगी,और अपना सामान खरीदकर घर भी आ गया। उधर दूसरी तरफ जमींदार के यहां पचास बोरी गेहूं की बोरियां बेचने के लिए जानी थीं। पहले उन पचास बोरी को ट्रेक्टर में लादने में समय लगेगा,फिर मण्डी में पहुंचेगा, बोरी उतारी गईं,उनका बजन किया गया,तब कहीं पेमेंट का नंबर आया।यह सब कुछ होते-होते शाम हो गई।

दुकानदार जमींदार से बोला कि आधे पैसे आज ले जाओ और शेष कल ले जाना। क्योंकि पेमेंट बड़ा था इसलिए। ठीक इसी प्रकार जो धर्म कर्म,दान  पुण्य, अच्छे कर्म करने में लगा रहता है और उससे जाने अनजाने कोई पाप कर्म या अधर्म हो जाता है तो उसका पेमेंट भी कम मिलेगा अर्थात हाथों हाथ दण्ड मिलता रहता है,वह अपने ज्ञात अज्ञात छोटे छोटे कर्मों के फल भोगता रहता है, उसका शेष नहीं रहता है।जिससे हमें लगता है कि ठाकुर जी अच्छे व्यक्ति को परेशान अधिक करता है ।और जो लोग दिन भर पाप कर्मों में लिप्त रहता है तो जमींदार की तरह उसका पेमेंट ( दण्ड) भी निश्चित रुप से बड़ा ही होगा कि नहीं? बताओ। यदि उसका (दंड )पेमेंट बड़ा है तो पेमेंट मिलने में भी देरी होगी।हो सकता है इसी जन्म में दण्ड मिल सकता है या फिर अगले जन्म में मिलेगा लेकिन मिलेगा अवश्य। कर्म और जीव का आपस में प्रगाढ़ होता है।जीव भले ही किसी योनि में चला जाए परन्तु उसके कर्म उसको ढूंढ़ ही लेते हैं।

महाभारत में वर्णन आता है कि भीष्म पितामह को बाणों की शैय्या मिली,किस कर्म के कारण मिली? पता है आपको? मैं बताता हूं सौ जन्मों से पूर्व किये हुए कर्म के कारण।सौ जन्म पहले भीष्म पितामह ने अपने बाण की नोक से एक सर्प को उठाकर पीछे की तरफ़ फेंक दिया और वह सर्प एक बबूल के पेड़ पर जाकर गिरा। बबूल के लम्बे लम्बे कांटे उसके शरीर में घुस गए,उसे बहुत कष्ट,छः महीने तक तड़पता है और भीष्म पितामह को श्राप दे गया कि जिस प्रकार छः महीने तक तड़पता हुआ मरा इसी प्रकार तुम्हारी भी मृत्यु होगी। इसके अलावा और भी बहुत सारे उदाहरण हैं। कुछ लोग कह देते हैं कि दूसरा जन्म किसने देखा? यदि नहीं देखा है तो एक बात बताओ किसी बच्चे ने जन्म लिया और वह जन्म लेते ही गूंगा है या बहरा है तो इस जन्म में तो उसने अभी कोई पाप कर्म किया नहीं,है तो ये प्रारब्ध ही अर्थात पिछले जन्म के  कर्मों का फल।कहने का तात्पर्य यह है कि कर्मों का फल सभी को भोगना निश्चित पड़ता है इस जन्म में नहीं, तो अगले जन्मों में। इसलिए कर्म करने से पहले दस बार विचार अवश्य करें कि इसका परिणाम क्या होगा।

By nit

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Exit mobile version