नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

किसी शहर की लोकल बॉडी अपनी नाकामी के लिए आसपास के गांवों को ज़िम्मेदार ठहराकर उनपर टैक्स का बुलडोजर चलाने के लिए आमादा हो जाए तब मामला उलझ जाता है। जलगांव जिले की मिनी बारामती जामनेर नगर परिषद ने आसपास के पांच गांवों से अनुरोध किया है कि वे उनकी ग्राम पंचायतों को बर्खास्त कर जामनेर नगर परिषद क्षेत्र मे समाहित हो जाए। खबर में प्रकाशित पत्र जामनेर नगर परिषद ने वाकी खुर्द ग्राम पंचायत के ग्राम सेवक को भेजा है। पत्र मे ग्राम पंचायत को नगर परिषद में समाहित करने का बड़ा दिलचस्प कारण बताया गया है। नगर परिषद के प्रशासक लिखते है कि जामनेर शहर के आसपास के गांवों के नागरिक रोजगार अन्य कारणों से जामनेर में आते हैं इससे जामनेर की चल जनसंख्या में वृद्धि हो जाती है। इतने सारे लोगो के जामनेर में आवागमन के कारण नगर परिषद द्वारा दी जाने वाली बुनियादी सेवाओं पर बोझ पड़ता है। शहर के भीतर बाहर सेवा मुहैय्या कराने में नगर परिषद को तकलीफ़ होती है।
इस लिए भीतरी और बाहरी बस्तियों में बुनियादी सेवा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए नगर परिषद जामनेर ने 28 फरवरी 2025 को शासकीय प्रस्ताव पारित कर यह फैसला लिया है कि आसपास की ग्राम पंचायतें बर्खास्त कर नगर परिषद में विलीन हो जाए। इस प्रस्ताव के सम्मति स्वरूप संबंधित ग्राम पंचायतें ग्राम सभा की मंजूरी लेकर नगर परिषद को गदगद करे। सूत्रों के मुताबिक वाकी बुद्रुक, वाकी खुर्द, शिंगाइत, पलासखेड़ा गुजराचे, टाकली बुद्रुक इन पांच गांवों की पंचायतों को जामनेर नगर परिषद में समाहित होने का अनुरोध किया गया है। नगर परिषद ने अपनी ओर से यह गेंद ग्राम पंचायतों के पाले में डाल दी है। ग्राम पंचायतों ने कभी भी नगर परिषद क्षेत्र में शामिल होने की मांग नहीं की है। अगर यह सारे के सारे गांव जामनेर नगर परिषद में समाहित हो गए तो स्वाभाविक रूप से वहां के आम नागरिकों को ग्राम पंचायत की तुलना में जामनेर नगर परिषद को कई गुना अधिक टैक्स देना पड़ेगा। पंचायतों को नगर परिषद में शामिल करने की योजना विधानसभा चुनाव नतीजों के आंकड़ों से प्रभावित नज़र आ रही है। ग्राम सभाएं समाहन के इस प्रस्ताव पर जो रुख अपनाएगी उसपर वहां की जनता की आर्थिक स्थिति और बच्चों का भविष्य टीका हुआ है।
