मकसूद अली/सैय्यद फैजानुद्दीन, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT;
भारत कृषिप्रधान देश है, पांच वर्ष में किसानों का उत्पन्न दोगुना करने के लिए केंद्र व राज्य सरकार प्रयासरत है, देश के प्रधानमंत्री “पर ड्रॉप मोर क्रॉप” का नारा दे रहे है, इसे वास्तव में लाने के लिए कृषी विद्यापीठ किसान केंद्र बिंदू मानकर संशोधन करे, ऐसा प्रतिपादन महाराष्ट्र के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने किया है। अकोला के डॉ. पंजाबराव देशमुख कृषी विद्यापिठ अंतर्गत वसंतराव नाईक कृषि जैव तंत्रज्ञान महाविद्यालय के नुतन वास्तु का लोकार्पण करते समय वे बोल रहे थे। इस समय मंच पर कृषि व फलोत्पादन मंत्री पांडूरंग फुंडकर, पालकमंत्री मदन येरावार, महसूल राज्यमंत्री संजय राठोड, जिल्हा परिषद अध्यक्षा माधुरी आडे, शेतकरी स्वावलंबन मिशन के अध्यक्ष किशोर तिवारी, सफाई कर्मचारी संघटन के रामोजी पवार, कृषि विद्यापीठ के कुलगुरू डॉ. विलास भाले उपस्थित थे।
विदर्भ का यह पहला शासकीय कृषी जैवतंत्रज्ञान महाविद्यालय है, ऐसा राज्यपाल ने बताया। पुर्व मुख्यमंत्री स्व.वसंतराव नाईक ने किसानों की प्रगति के लिए अच्छा काम किया है। उनके योगदान के लिए उनका नाम हमेशा याद रखा जाएगा। गत कुछ वर्षो से किसान दिक्कतों में हैं। हवामान में बदलाव का असर खेती पर हो रहा है। इसे कम करने के लिए प्रयास करना जरूरी है।
कार्यक्रम का प्रास्ताविक कृषि विद्यापीठ के कुलगुरू डॉ. विलास भेले ने किया। संचालन डॉ. प्रदीप बोरकर ने तो आभार डॉ. आर.एम. गाडे ने व्यक्त किया। इस मौके पर नगराध्यक्षा कांचन चौधरी, विभागीय आयुक्त पियुष सिंह, अमरावती परिक्षेत्राचे विशेष पुलिस महानिरीक्षक छगन वाकडे, जिल्हाधिकारी डॉ. राजेश देशमुख, मुख्य कार्यकारी अधिकारी दीपक सिंगला, पुलिस अधिक्षक एम. राजकुमार, कृषी विद्यापीठाचे संशोधन संचालक डॉ. व्ही.के. खडसे, विस्तार शिक्षण संचालक डी.एम. मानकर, कुलसचिव डॉ. पी.आर. कडू, अधिष्ठाता डॉ. एम.बी.नागदेवे यांच्यासह शास्त्रज्ञ, प्रगतीशील शेतकरी और नागरिक उपस्थित थे।
