रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

शारदा विद्या मंदिर, झाबुआ में ‘स्वस्थ संकल्प, डायबिटीज से बचाव’ विषय पर एक जागरूकता सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को टाइप-2 डायबिटीज जैसी जीवनशैली जनित बीमारियों के प्रति सजग बनाना और उन्हें स्वास्थ्यवर्धक जीवनशैली अपनाने हेतु प्रेरित करना था। इस अवसर पर विद्यालय ने ‘शुगर बोर्ड’ बनाने का संकल्प लिया, जिसमें बच्चों के भोजन में प्रयुक्त चीनी की मात्रा की निगरानी, जागरूकता स्लोगन, और सप्ताह में एक ‘नो शुगर डे’ जैसी पहलें की जाएंगी।

कार्यक्रम की मुख्य अतिथि शारदा समूह की संचालिका डॉ. खुशी शर्मा ने बच्चों को डायबिटीज से जुड़ी एक भावनात्मक कहानी सुनाई, जिसमें एक बच्चे की अनियमित जीवनशैली के कारण आई स्वास्थ्य समस्याओं को सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया। डॉ. शर्मा ने कहा, “यदि आज के बच्चे अपने खाने-पीने और व्यायाम को लेकर सचेत हो जाएं, तो न केवल वे मधुमेह से बच सकते हैं, बल्कि भविष्य में समाज को एक स्वस्थ नागरिक भी दे सकते हैं।” उन्होंने अभिभावकों और शिक्षकों से भी अपील की कि वे बच्चों की आदतों पर सकारात्मक मार्गदर्शन करें।
साथ ही अतिथि के रूप में उपस्थित मां त्रिपुरा कॉलेज की प्रभारी प्राचार्य श्रीमती स्वाति ठाकरे ने भी बच्चों को कहानी के माध्यम से बताया कि कैसे मीठे का अत्यधिक सेवन धीरे-धीरे शरीर को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने कहा, “बचपन में पड़ी आदतें जीवनभर साथ चलती हैं। यदि हम बचपन में चीनी से दूरी और सेहत से दोस्ती सिखा दें, तो आने वाली पीढ़ी को डायबिटीज छू भी नहीं पाएगी।” उन्होंने छात्रों को पानी, फल और प्राकृतिक चीज़ों से दोस्ती करने की सलाह दी।
सेमिनार में विद्यालय की छात्राओं– आर्या पांडे, दर्शनी नायडू और सिद्धिक्षा आचार्य– ने विचारोत्तेजक वक्तव्य प्रस्तुत किए, जिनमें संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और व्यायाम के महत्व को रेखांकित किया गया। इसके बाद छात्रों द्वारा तैयार किए गए पोस्टर्स का प्रदर्शनी के रूप में प्रदर्शन हुआ, जिसमें “मीठा नहीं, सेहत चाहिए” जैसे स्लोगन बच्चों ने बड़ी रचनात्मकता से प्रस्तुत किए। अतिथियों ने पोस्टर प्रदर्शनी का अवलोकन किया और बच्चों के रचनात्मक प्रयासों की सराहना की कार्यक्रम का संचालन श्री अपसिंह बरिया द्वारा किया गया, जबकि समापन अवसर पर विद्यालय के उपप्राचार्य श्री मकरंद आचार्य ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों एवं शिक्षकों का आभार प्रकट किया। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य सिर्फ बीमारी से बचाव नहीं, बल्कि एक स्वस्थ जीवनशैली को विद्यालय संस्कृति का हिस्सा बनाना है।
