नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

इजराइल की कंपनी NSO ने कैलिफोर्निया की एक अदालत के सामने यह कबूल किया है कि उसके द्वारा बनाए गए पेगासस नाम के सॉफ्टवेयर से दुनिया भर के 1400 VVIP’s की निगरानी की गई है। व्हाट्सएप की ओर से निजता का उल्लंघन तहत पेगासस के खिलाफ़ कोर्ट में 2019 में दायर किए गए मुकदमें के कामकाज से यह जानकारी सामने आई है। उस समय पेगासस को लेकर भारत में काफ़ी उथलपुथल मची। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मामले को लेकर संसद में सरकार से JPC की मांग की। मोदी सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर तो कभी पेगासस की खरीद डील से किनारा कर JPC को ठुकराती रही। NSO कहता रहा कि उसने दुनिया के कई देशों की सरकारों को पेगासस बेचा है। कोर्ट ने जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया था जिसको मोदी सरकार ने सहयोग नहीं किया।
अप्रैल-मई 2019 जब भारत में लोकसभा के आम चुनाव हो रहे थे तब दुनिया भर के 1223 लोगों में से भारत के 100 से अधिक VIPs के फोन पेगासस सर्विलांस पर रखे गए थे। इनमें विपक्ष के नेता , कोर्ट्स के जजेस और कुछ स्वतंत्र पत्रकार , चुनाव आयुक्त शामिल बताए जा रहे हैं। इन 100 लोगों के नंबर के साथ NSO ने सारे दस्तावेज कैलिफ़ोर्निया की कोर्ट में पेश कर दिए है। पेगासस द्वारा हैक किया गया व्हाट्सअप का चैटिंग रिकॉर्ड और डेटा अब इजराइल और अमरीका दोनों के पास मौजूद है जो भारत की सुरक्षा के लिए काफी ख़तरनाक साबित हो सकता है।
भारत के मुख्य सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और गौतम अदानी पर अमरीका के कोर्ट में मुकदमे चल रहे हैं। पेगासस से राजनीतिक लाभ उठाने के चक्कर में मोदी सरकार ने देश की सामरिक सुरक्षा को दांव पर लगा दिया है। भारत की जनता मांग कर रही है कि मोदी सरकार लोकसभा का विशेष सत्र बुलाकर इस गंभीर मामले पर सारा सच देश के सामने रखे।
