सुभाष पांडेय, मीरा-भाईंदर (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 100 (सौ दिन) कार्यक्रम के अंदर’ 7 कलमी रूपरेखा’ क्षेत्रीय शासकीय व निमशासकीय कामकाज के आधार पर दिनांक 07 जनवरी 2025 से शुभारंभ किया गया था जिसमें 1) संकेतस्थल, 2) जीवन को सुलभ एवं आसान बनाना, 3) स्वच्छता, 4) जनता के शिकायतों का निराकरण, 5) कार्यालय के अंदर हर तरह की हाइटेक्नॉलॉजी से युक्त सुविधा, 6) निवेश प्रसार, 7) क्षेत्रिय कार्यालय दौरा मुद्दे पर प्रभावी कार्यक्रम मुद्दे पर निर्देश दिए थे।

बता दें कि राज्य के मुख्यमंत्री द्वारा 7 सूत्री कार्यक्रम के तहत 100 दिन के भीतर राज्य के सभी पुलिस स्टेशनों को स्मार्ट एवं हाईटेक बनाने का निर्देश दिया था। नये सिरे से हर कक्ष का नूतनीकरण, साज़सज़्ज़ा, पुलिस स्टेशनों रंग-रोगन, फाइलों का रखरखाव, रिकॉर्ड अप-टू-डेट, ठाणे अंमलदार कक्ष, आगन्तुक कक्ष, जनता के लिए सुंदर अभ्यांगत कक्ष, प्याऊ, गोपनीय-कक्ष, विश्रांति-गृह, मीटिंग-रूम, ई- स्मार्ट हाईटेक पोलिसिंग के तहत मीरा-भाईंदर व वसई विरार पुलिस को स्मार्ट पोलिसिंग संकल्पना के तहत ISO 9001 : 2015 CERTIFIED उपक्रम अंतर्गत 1) पुलिस-प्रशासन को सामान्य नागरिकों के लिए अधिक अनुकूल बनाना, 2) अत्याधुनिक-ढंग से सुसज्जित व प्रशिक्षित पुलिस दल व पुलिसिंग में आधुनिक तंत्रज्ञान का अधिक-से-अधिक प्रयोग में लाना, 3) आपातकालीन परिस्थितियों में शीघ्रातिशीघ्र प्रतिसाद देना, 5) पुलिस वर्तन में सकारात्मक बदल के साथ-साथ संवेदनशील व विश्वसनीय पुलिस दल समाज के लिए तैयार करना विशेष उपलब्धि है। स्मार्ट पोलिसिंग का मतलब मीरा-भाईंदर व वसई विरार के पुलिस आयुक्त मधुकर पांडेय ने एक ‘प्रेस-कॉन्फ्रेंस’ के माध्यम से एमबीवीवी पुलिस आयुक्तालय में पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि, SMART का मतलब इस प्रकार देखें । S :- Strict and sensitive, M :- Modern and mobile, A :- Alert and accountable, R:- Reliable and responsive, T :- Techno-savvy and trained police force.

ज्ञात हो कि मीरा-भाईंदर व वसई विरार पुलिस आयुक्तालय, राज्य-सरकार के गृह-विभाग के निर्देश के बाद सन 1 अक्टूबर 2020 से क्रियान्वित है। उक्त एमबीवीवी पुलिस आयुक्तालय के प्रथम पुलिस आयुक्त का गौरव ईमानदार व कर्मठ आईपीएस वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी सदानंद दाते को प्राप्त है जोकि मुंबई 7/11 आतंकी हमले के समय मुंबई के हालात को काबू करने वाले राष्ट्रपति पदक प्राप्त आईपीएस पुलिस अधिकारी के रूप में थे। इस समय सदानंद दाते एनआईए के डीजी हैं।
उल्लेखनीय है कि वर्तमान में मीरा-भाईंदर व वसई-विरार पुलिस के आयुक्त मधुकर पांडेय के नेतृत्व में अपर पुलिस आयुक्त प्रकाश गायकवाड़, समस्त सहायक पुलिस आयुक्त व सभी पुलिस स्टेशनों के कामकाज को स्मार्ट पुलिस स्टेशन अंतर्गत 1) काफ़ी समय से कालबाह्य अभिलेख को पुलिस मेन्युवल अनुसार ‘नाश’ की प्रक्रिया की गयी साथ ही ई-फाइलिंग प्रोसेस के तहत आधुनिक ढंग से सिस्टेमेटिक फाइलों को कंप्यूटरीकृत ढंग से रिकॉर्ड को तैयार किया गया है। किसी भी समय तत्काल अभिलेख किसी भी पुलिस अधिकारी एवं ठाणे अंमलदार को जरूरत पड़ने पर रिकॉर्ड उपलब्ध हो सकेगा। ऐसी ई-रिकार्ड फाइलिंग की व्यवस्था की गयी है। 2) पुलिस स्टेशन के परिसर में कई सालों से पड़े बेवारस वाहन, गुन्हा में जप्त वाहन अस्त-व्यस्त पड़ी हुई थीं। उन जर्जर वाहनों को शासकीय नियमानुसार नीलामी प्रक्रिया कर पुलिस थानों के परिसरों को साफ़-सुथरा किया गया। 3) स्मार्ट पोलिसिंग के तहत पुलिस स्टेशन के पूरे परिसर का सुशोभीकरण किया गया साथ ही स्त्री एवं पुरुष पृथक स्वच्छतागृह की व्यवस्था की गयी। 4) इसी तरह मानक के अनुसार समस्त पुलिस कार्यालयों को नो प्लॉस्टिक झोन एवं ग्रीन ऑक्सीजन झोन में तब्दील किया गया। 5) सायबर क्राइम जन-जागृति, आर्थिक अपराध, महिला सुरक्षा एवं सर्वसाधारण संबंधित विषयों पर विविध पुलिस स्टेशनों के पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों का 100 से अधिक कार्यशाला का आयोजन किया गया था। 6) आग आपत्ति संकट से बचने के लिए तत्काल आग लगने जैसी समस्या से बचने के लिए निराकरण हेतु मूलभुत-प्रशिक्षण देने के साथ-साथ सभी स्थानों पर अग्निशामक यंत्र बैठाये गये हैं। 7) समस्त पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों समेत महाराष्ट्र सुरक्षा बल (मसुब) के कर्मचारियों को नागरिकों से अच्छे ढंग से बर्ताव करने हेतु सॉफ्ट स्किल्स प्रशिक्षण दिया गया है। 8) प्रत्येक शनिवार को नागरिकों की समस्याओं को सुनने के लिए ‘शिकायत-निवारण दिन’ का आयोजन भी किया जायेगा साथ ही संबंधित पुलिस स्टेशन अंतर्गत अकेले रहने वाले वरिष्ठ-नागरिकों की सूची बनाकर बीटमार्शल व बीट अधिकारियों को समय-समय पर उन्हें भेंट देकर उनकी हर तकलीफ व समस्याओं को सुना जाने की व्यवस्था की गयी है। 9) पुलिस उप-आयुक्त, परिमंडल-1 अंतर्गत 7 वर्षों से अधिक सज़ा मामलों में सबूतों को साक्ष्यों को जमा करने हेतु (I – BIKE) यंत्रणा की व्यवस्था प्रशिक्षित-दल द्वारा की गयी है। 10) इसी तरह स्मार्ट पोलिसिंग के तहत जनता में सायबर क्राइम से संबंधित अपराधों संबंधी जन-जागृति, आर्थिक गुन्हेगारी, महिला सुरक्षा एवं सर्वसाधारण संबंधित विषयों पर जनजागृति मुहिम आयोजित करने से सायबर क्राइम पर अंकुश लगा है। 11) ई बीट मार्शल द्वारा आधुनिक पुलिसिंग के तहत शिकायकर्ता , पीड़ित को तत्काल पुलिस सहायता मिल सकेगी। 12) इसी तरह हर पुलिस स्टेशन में आने वाले नागरिकों को इन्ट्री-रजिस्टर बुक में नाम एवं पुलिस का नागरिकों के साथ किस तरह का व्यवहार या रवैया की जानकारी समाधानकारक या समाधान न होने पर नये उपक्रम के तहत QR कोड को स्कैन कर उपलब्ध फार्म को टिक कर फार्म भरने की व्यवस्था की गयी है। 13) इसी तरह स्मार्ट पोलिसिंग के तहत पुलिस-स्टेशनों एवं कार्यालयों में आगन्तुकों को अभ्यांगत-कक्ष में बैठने की व्यवस्था व डिजिटल प्रजेंटेशन की व्यवस्था की गयी है। 14) स्मार्ट पोलिसिंग के तहत समय-सीमा अंतर्गत अभिलेख नियमानुसार नाश कर 47, 054 /- रुपये सरकार जमा किया गया है साथ ही पुलिस स्टेशन परिसर में व्याप्त 255 बेवारस वाहनों को नीलाम कर 6 लाख 46 हज़ार 200 रुपये सरकार जमा किया गया है। इसी क्रम में दिनांक 07 जनवरी 2025 से दिनांक 15 अप्रैल 2025 के बीच नीलाम द्वारा प्राप्त 2 करोड़ 10 लाख 56 हजार 424 रुपये संबंधित लोगों को लौटाये। 15) समाज में जन-जागरण हेतु स्कूल, कॉलेज, गृहनिर्माण सोसायटी, व्यापारी-वर्ग, अस्पतालों व अन्य ठिकानों पर जन-जागृति शिविर का आयोजन किया गया। 16) देश भर में शुरू 112 डॉयल तत्काल पुलिस सहयोग हेतु कटिबद्ध मीरा-भाईंदर व वसई-विरार पुलिस राज्य भर में प्रथम स्थान पाने का गौरव प्राप्त है। 17) दिनांक 30 सितंबर 2024 को राज्य के मुख्यमंत्री के हस्तों कुल रुपये 6 करोड़, 89 लाख, 51 हजार, 184 रुपये मुद्देमाल संबंधित फरियादियों को लौटाये गए। 18) इसी तरह 26 वाहन, 47 मोबाइल, सोने के आभूषण, सायबर अपराध द्वारा ग़बन हुए नकदी कुल 2 करोड़ 68 लाख, 54 हजार, 164 रुपये मुद्देमाल संबंधित शिकायतकर्ताओं को लौटाने की जानकारी मीरा-भाईंदर व वसई-विरार पुलिस द्वारा दी गयी है। 19) एमबीवीवी पुलिस द्वारा ISO मानक स्मार्ट कार्यशैली संबंधित विस्तृत जानकारी पत्रकारों को दी है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में पुलिस आयुक्त ने स्मार्ट पोलिसिंग अंतर्गत तंत्रज्ञान व दल की गतिमानता, जनता से परस्पर सह-संबंध, पुलिस-वर्तन, पुलिसिया-जांच, आपातकालीन प्रतिसाद प्रणाली, ट्रॉफिक के नियम, अभिलेख-देखभाल, प्रशिक्षण के साथ-साथ पुलिस-स्टेशनों व कार्यालयों में साफ-सफाई रहना, पुणे की सोर कंसल्टेंसी एजेंसी द्वारा स्मार्ट पोलिसिंग संकल्पना पूरी की गयी है।
