सरवर खान ज़रीवाला, भोपाल, NIT; 
स्वच्छ भारत के विफलता की जीती जागती तस्वीर राजधानी भोपाल में वार्ड नंबर- 1 में देखने को मिल रही है। जहां की पार्षद राजकुमारी मीना है जो कि चुनाव जीतने के बाद वार्ड में आई नहीं हैं। वहां के निवासियों का कहना है कि उनके पति राजू मीना ही आते हैं और लोग जब उन्हें समस्या से अवगत कराते हैं तो वह झूठे आश्वासन देकर लोगों को टाल देते हैं।
लोगों का आरोप है कि क्या पार्षद का यही जिम्मेदारी है कि केवल आश्वासन देकर लोगों टाल दिया जाए या उनकी समस्याएं सुन कर उनका समाधान किया जाए। क्या महिला पार्षद की ड्यूटी केवल वोट लेने तक की है? जीतने के बाद खुद घर बैठ कर पति को पार्षद बना देना कहां इंसाफ है?
जबकि माननीय मुख्यमंत्री जी का यह दावा है पत्नी की पद पर उसके पति का कोई अधिकार नहीं होगा लेकिन राजकुमारी मीना जी जो की वार्ड नंबर एक की पार्षद हैं के द्वारा माननीय मुख्यमंत्री जी के आदेशों का धज्जियां उड़ाया जा रहा है।
