नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

संसदीय लोकतंत्र के रास्ते भारत पर हुकूमत कर रही बीजेपी की सोच में छिपी साम्राज्यवादी भावना साफ़ साफ़ नजर आने लगी है। महाराष्ट्र में बीजेपी सरकार ने तीन साल से लोकल बोर्ड के आम चुनाव नहीं करवाए हैं। हर दस साल बाद रिनिव होने वाले ओबीसी के राजकीय आरक्षण का मसला सरकार ने जानबूझकर सुप्रीम कोर्ट में ठेल रखा है। CM देवेन्द्र फडणवीस महाराष्ट्र में तमाम संस्थाओं पर मनमाने तरीके से एकछत्र शासन चला रहे हैं। प्रदेश की सभी जिला परिषद, पंचायत समिति, नगर निगम, नगर परिषद, नगर पंचायत, महानगर पालिकाओ को मंत्रालय ने अपने कंट्रोल में ले लिया है। प्रशासक की निगरानी में नगरों में सड़क बिजली पानी साफ़ सफ़ाई का सारा का सारा सिस्टम ध्वस्त हो चुका है।
मंत्रियों के निर्वाचन क्षेत्र की गरीब जनता प्राइवेट अस्पतालों के महंगे इलाज़ के बिल चुकाने के लिए अपने खून पसीने से जमा की गई पाई पाई खर्च करने को मजबूर है। नेता गिरीश महाजन की अविरत घनघोर मेहनत से विकसित जामनेर में मच्छर पैदावार यूनिट ने यहां के लोगो का जीना दुश्वार कर दिया है। सूरज ढलते हि अचानक से लाखों मच्छरों के झुंड नागरिकों पर हमला कर देते हैं। यहां के लोगों को कट प्रैक्टिस के कुचक्र से कभी भी निजाद नहीं मिलेगा। गांधी चौक में आवारा कुत्ते हर रोज दर्जनों लोगों को काट रहे हैं फिर भी निगम के CO खामोश हैं। गोदी पत्रकारों की ख़बर संज्ञान से जेसीबी लेकर बेबस रेहड़ी पटरी वालों को खदेड़ने वाला प्रशासन कभी बुनियादी ढांचे की समीक्षा करते नहीं देखा गया।
चुनाव के मुहाने सड़क पर उतरने वाले विपक्ष का भगवाकरण हो चुका है। डेमो के लिए फेंगिंग मशीन पकड़े गिरीश महाजन और हैंड स्प्रे लेकर ज्योत्स्ना विसपुते के साथ किसी जमाने मे गली मोहल्लों मे घूमने वाले कांग्रेसी यह दो प्रसंग जामनेर की राजनीति मे आखिरी पब्लिक इवेंट फोटो थी। लोकल बोर्ड के चुनाव कब करवाए जाएंगे यह कोर्ट को पता है सरकार तो सिर्फ़ इन संस्थाओं पर नियंत्रण जानती है। बोर्ड्स सदस्यों के वेतन पर सरकारी तिज़ोरी से खर्च होने वाला इतना करोड़ रुपया बच गया इस तुकबंदी के साथ गोदी मीडिया कल लोकल बोर्ड के संवैधानिक प्रावधान को सिरे से नकारता नजर आएगा।
