विधानसभा में प्रधानमंत्री फसल बीमा को लेकर किसानों की आवाज़ बना बुरहानपुर | New India Times

मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

विधानसभा में प्रधानमंत्री फसल बीमा को लेकर किसानों की आवाज़ बना बुरहानपुर | New India Times

मंगलवार को मध्यप्रदेश विधानसभा में विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) तथा नेपानगर विधायक सुश्री मंजू दादू ने बुरहानपुर जिले के के केला फसल किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत मौसम आधारित फस्ल बीमा योजना का लाभ दिलाने हेतु पुनः मुद्दा उठाया। नेपानगर विधायक सुश्री मंजू दादू द्वारा मध्यप्रदेश विधानसभा में तारांकित प्रश्न क्रमांक 222 के माध्यम से बुरहानपुर जिले के केला फसल किसानों की समस्याओं से अवगत कराया।

तत्पश्चात श्रीमती अर्चना चिटनिस ने सप्लीमेंटी प्रश्न के माध्यम से जिले के किसानों की समस्याओं से अवगत कराते हुए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत मौसम आधारित फसल बीमा का किसानों को लाभ देने हेतु समय-सीमा निर्धारित कर शीघ्रता-शीघ्र किसानों के हित में निर्णय लेने की मांग रखी। जिस पर उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नारायणसिंह कुशवाह ने कहा कि भारत सरकार के नवीन दिशा-निर्देशानुसार विंड्स मैनुअल 2023 योजनांतर्गत कृषि विभाग द्वारा कार्यवाही प्रचलन में है।

6 बार टेंडर जारी किए गए, परंतु बीमा दरे अधिक आने के कारण योजना का क्रियान्वयन नहीं किया जा सका। खरीफ 2023-24 से रबी 2025-26 के लिए निविदा आमंत्रित की गई, किन्तु भारत सरकार द्वारा कायर्वाही प्रचलन में है। अप्रैल 2025 में बैठक आयोजित कर समय-सीमा निर्धारित की जाएगी और किसानों के हित में निर्णय लिया जाएगा।
ज्ञात हो कि इसके पूर्व श्रीमती अर्चना चिटनिस ने विधानसभा में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को लेकर मुद्दा उठाया जा चुका है। साथ ही श्रीमती चिटनिस लगातार प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनांतर्गत मौसम आधारित फसल बीमा का लाभ किसानों को मिल सके, इस हेतु लगातार प्रयत्नशील है।

श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि मध्यप्रदेश में लगभग 25 लाख हेक्टेयर रकबे में उद्यानिकी फसलों की खेती होती है। बुरहानपुर जिले के किसानों को वर्ष 2019-20 से आज दिनांक तक उद्यानिकी फसलों को फसल बीमा योजनांतर्गत सम्मिलित नहीं किया जा रहा है। प्रदेश में पिछले 4-5 वर्षों में उतार-चढ़ाव (जलवायु परिवर्तन) के कारण उद्यानिकी फसलों में असमयिक क्षति एवं उत्पादकता में कमी होने के कारण उद्यानिकी फसलें ले रहे कृषकों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है, जबकि पड़ोसी राज्यों में उद्यानिकी फसलों का फसल बीमा किया जा रहा है, जो कि मध्यप्रदेश के कृषकों के लिए बड़ी विसंगति है।

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