एम.एम. सिद्दीकी, भोपाल (मप्र), NIT:

राजधानी से लगे सीहोर जिले के कोथरीकला में स्थित वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय परिसर में जहां स्टूडेंट के बाइक स्टंट शो ने मौजूद दर्शकों को दांतों तले उंगली दबाने पर मजबूर कर दिया तो वहीं रंग-ए-रास डांस नाइट, ड्रोन शो ने जमकर तालियां बटोरीं। यही नहीं नृत्य और नाटक प्रदर्शन, क्विज़, टैलेंट हंट और कोडिंग चैलेंज जैसे हुए रोमांचक कार्यक्रम हुए। मौका था वार्षिक सांस्कृतिक और तकनीकी महोत्सव ‘अद्वितीय 2025’ कार्यक्रम का। तीन दिवसीय उक्त महोत्सव 20 से 22 फरवरी, 2025 तक आयोजित किया गया।
महोत्सव में 131 विविध कार्यक्रम हुए, जिनमें 53 तकनीकी और 59 गैर-तकनीकी प्रतियोगिताएं, वर्चुअल कार्यक्रम और मध्य प्रदेश गौरव पुरस्कार जैसे रोमांचक कार्यक्रम शामिल थे।
महोत्सव में प्रदेश भर से 20 हजार से अधिक छात्रों ने भाग लिया, जिससे यह प्रतिभा दिखाने और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के लिए एक अद्वितीय मंच बन गया। उत्सव के पहले दिन पैरा-जूडो एथलीट और पदक विजेता कपिल परमार द्वारा उद्घाटन के साथ हुई। उद्घाटन समारोह में चांसलर श्री डॉ. जी. विश्वनाथन, उपाध्यक्ष श्री शंकर विश्वनाथन, सहायक उपाध्यक्ष सुश्री कादंबरी एस. विश्वनाथन, ट्रस्टी श्रीमती रमानी बालासुंदरम, प्रो-वाइस चांसलर डॉ. टी.बी. श्रीधरन और रजिस्ट्रार श्री डॉ. के.के. नायर मौजूद थे। अद्वितीय 2025 का समन्वय श्री डॉ. योगेश शुक्ला द्वारा किया गया।
इस दौरान दोपहर में रोमांच से भरपूर बाइक स्टंट शो हुआ, जिसमें पेशेवर स्टंट राइडर्स ने शानदार हाई जंप, बैकफ्लिप और 360 डिग्री स्पिन का प्रदर्शन किया, जिससे दर्शक आश्चर्यजनक रह गए। महोत्सव की शाम डांस फ्लोर में बदल गई, क्योंकि डीजे लहर ने अपने ऊर्जावान ईडीएम और बॉलीवुड रीमिक्स के साथ समां बांध दिया। उनकी दमदार धुनों और प्रदर्शन ने पूरे कैंपस को झूमने पर मजबूर कर दिया।
महोत्सव में यह हुए खास आयोजन रघु दीक्षित बैंड का लोक-रॉक जादू: रात का मुख्य आकर्षण ‘द रघु दीक्षित प्रोजेक्ट’ था, जिसने अपने अनोखे लोक-रॉक फ्यूजन से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। जब उन्होंने अपने लोकप्रिय ट्रैक ‘पराशिवा’, ‘खिड़की’ और ‘शक्कर परी’ प्रस्तुत किए, तो पूरा ऑडिटोरियम एक सुर में झूम उठा। रघु दीक्षित की विद्युतीय ऊर्जा, मन को झकझोर देने वाला संगीत और करिश्माई मंचीय उपस्थिति ने एक अविस्मरणीय संगीतमय माहौल बनाया।
—रंग-ए-रास डांस नाइट – महोत्सव का दूसरा दिन तकनीकी और सांस्कृतिक प्रतियोगिताओं से भरा रहा, जहां छात्रों ने अपनी रचनात्मक और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन किया। यह शाम एक शानदार डांस शोकेस के लिए समर्पित थी, जहां वीआईटी भोपाल के विभिन्न डांस क्लबों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। इस कार्यक्रम में गुजराती गरबा, बॉलीवुड शैली, भारतीय शास्त्रीय नृत्य और अन्य विविध रूप शामिल थे, जिन्होंने अपनी लय और सुंदरता से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
—महोत्सव का बड़ा आकर्षण रहा एमपी गौरव पुरस्कार
महोत्सव के अंतिम दिन का सबसे बड़ा आकर्षण एमपी गौरव पुरस्कार था, जिसमें उन प्रतिष्ठित हस्तियों को सम्मानित किया गया, जिन्होंने अपने क्षेत्रों में असाधारण योगदान दिया है, जिससे मध्य प्रदेश और भारत को गौरव प्राप्त हुआ है।
यह हुए एमपी गौरव पुरस्कार से सम्मानित:
—भूरी बाई (पद्मश्री, कला) – प्रसिद्ध भील कलाकार जिन्होंने भील चित्रकला को अंतर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई।
—दुर्गा बाई व्याम (पद्म श्री, कला) – एक प्रतिष्ठित गोंड कलाकार जो गोंड पेंटिंग को आधुनिक बनाने के लिए जानी जाती हैं।
—भगवती लाल राजपुरोहित (पद्मश्री, साहित्य) – राजस्थानी और हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण योगदान।
—कालूराम बामनिया (पद्मश्री, कला) – पारंपरिक मालवा लोक गीतों के संरक्षक और एक प्रसिद्ध लोक गायक।
—भज्जू श्याम (पद्मश्री, कला) – अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित गोंड कलाकार।
—सत्येन्द्र सिंह लोहिया (पद्म श्री, खेल) – एक पैरा-तैराकी विश्व रिकॉर्ड धारक जिन्होंने सफलतापूर्वक इंग्लिश चैनल पार किया।
—अवनीश तिवारी (पीएम राष्ट्रीय बाल पुरस्कार) – डाउन सिंड्रोम से पीड़ित 7 वर्षीय बच्चा, जिसने एवरेस्ट बेस कैंप तक सफलतापूर्वक ट्रैकिंग की, उसे सामाजिक सेवा में उत्कृष्टता के लिए सम्मानित किया गया।
—कपिल तिवारी (पद्मश्री, शिक्षा) – एक प्रमुख विद्वान जो भारतीय लोक संस्कृति और साहित्य के संरक्षण के लिए जाने जाते हैं।
—बनवारी लाल चौकसे (पद्मश्री, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी)- एक वैज्ञानिक जिन्होंने प्रौद्योगिकी में उत्कृष्ट योगदान दिया।
—कपिल परमार (अर्जुन पुरस्कार विजेता, खेल)- एक पैरा-जूडो चैंपियन जिन्होंने भारत को गौरवान्वित किया।
—भेरू सिंह (पद्मश्री, समाज सेवा)- ग्रामीण विकास में असाधारण योगदान के लिए मान्यता प्राप्त।
—मुनीश्वर सिंह डावर (पद्म श्री, कला)- एक प्रतिष्ठित कलाकार जो पारंपरिक भारतीय संगीत और लोक कला में अपने अमूल्य योगदान के लिए जाने जाते हैं।
यह भी रहा खास आकर्षण का केंद्र, सुनिधि चौहान का ऐतिहासिक लाइव कॉन्सर्ट जैसे ही सुनिधि चौहान ने मंच पर कदम रखा, सभागार तालियों, सीटियों और उत्साह से गूंज उठा। यह सिर्फ एक संगीत कार्यक्रम नहीं था बल्कि यह एक अवास्तविक संगीत अनुभव था, जहां प्रत्येक छात्र और दर्शक ताल पर थिरक रहे थे। मंच की लाइटें चमकीं और धड़कनें कम हो गईं, हजारों छात्र एक साथ कूद पड़े और इस पल में पूरी तरह डूब गए। सुनिधि की दमदार आवाज, बेजोड़ ऊर्जा और स्टेज करिश्मा ने साबित कर दिया कि वह सिर्फ एक गायिका नहीं बल्कि भारतीय संगीत की सच्ची रॉकस्टार हैं। प्रत्येक गीत के साथ, दर्शकों का उत्साह बढ़ता गया, और जैसे ही उन्होंने अपना अंतिम गीत समाप्त किया, भीड़ “एक और!” के नारे लगाने लगी।
