नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

मणिपुर में आज फिर से हिंसा भड़की राज्य की जमीन के नीचे दबे खनिजों की मलकियत को लेकर यह संघर्ष है। 2017 में सरकार ने कई Memorandum of Understanding साइन किए हैं।कुकी के खिलाफ दूसरे खड़े कर दिए हैं ये जल जमीन जंगल की लड़ाई है यह वक्तव्य है मशहूर समाजसेविका मेधा पाटकर का पुणे के कोथरुड में सुरेश द्वादशीवार की अध्यक्षता में आयोजित गांधी विचार साहित्य सम्मेलन के तीसरे सत्र में वो बोल रही थी। अंतरात्मा की आवाज़ इस कल्पना पर बात रखते हुए पाटकर ने कहा हमारे भीतर का आवाज़ हमें ढाढस देता है लेकिन बाहर डी जे का आवाज काफ़ी बढ़ चुका है। नोट बैंक और वोट बैंक की राजनीति समाज को एक दूसरे के खिलाफ खड़ी कर रही है। खैरलांजी से मणिपुर तक महिलाएं निशाना बनाई जा रही है।

हिंसा से शोषण रुकने वाला नहीं हमें अहिंसा के रास्ते से जाना पड़ेगा। आत्ममुग्ध हुए बिना कानूनी और मैदानी लड़ाई को लड़ना होगा। देश बचाओ देश बनाओ यात्रा के बाद हम फ़ैजाबाद अयोध्या पहुंचे तो देखा कि भव्य मंदिर बना है लेकिन लोग त्रस्त है। तीन कानूनों के खिलाफ़ 735 किसान शहीद हो गए बावजूद सरकारी नीतियां आज भी नई शक्ले खोज रही है। हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के कारण हमें जीवन जीने का अधिकार मिला भारत के सुप्रीम कोर्ट ने उसे माना। संविधान के आधार पर जीवन प्रणाली बदलनी होगी संविधान को अपने अंदर अमल में लाओ। सत्ताधारी बनाम समाजवादी विचारों के साथ हमें आगे बढ़ना है। मंच पर कुमार सप्तर्षि सोनम वांगचुक रामदास भटकल समेत मान्यवर मौजूद रहे।
