नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

बीड जिले के मस्साजोग के सरपंच संतोष देशमुख की निर्ममता से की गई हत्या के लंबे समय बाद मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने मंत्री धनंजय मुंडे का इस्तीफ़ा स्वीकार किया। फडणवीस ने मीडिया के सामने आ कर मुंडे के इस्तीफ़े की जानकारी इस प्रकार से दी जैसे कि उनकी सरकार ने महाराष्ट्र की न्यायप्रिय जनता पर कोई एहसान कर दिया हो। किसी भी मंत्री को कैबिनेट से बर्खास्त करने का अधिकार CM के पास होता है फिर ये ड्रामा क्यों ? देशमुख हत्याकांड , राज्य में महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार और एक पार्टी की विचारधारा में समाहित हो चुकी कानून व्यवस्था की ज़िम्मेदारी स्वीकार कर सबसे पहले देवेन्द्र फडणवीस को गृह विभाग त्याग देना चाहिए था।
महाराष्ट्र विधानसभा का चुनाव एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में लड़ा गया लेकिन नतीजों के बाद मोदी-शाह ने RSS के दबाव में फडणवीस को महाराष्ट्र की जनता पर थोप दिया। देशमुख हत्याकांड में धनंजय मुंडे समर्थक वाल्मीक कराड़ और उसकी माफिया गैंग आरोपी है। एक घोटाले में दोषी पाए गए अजीत पवार गुट के मंत्री माणिकराव कोकाटे को कोर्ट की ओर से दो साल की सजा सुनाई जाने के बाद कोकाटे की विधायकी और मंत्री पद दोनों निरस्त हो जाने चाहिए थे लेकिन यहां भी सरकार कोकाटे को बचाने में लगी है। 2014-2024 का रेकॉर्ड उठाकर देख लीजिए देवेन्द्र फडणवीस के राज को क्लीन चिट युग की नज़र से देखा जा सकता है।
दिल्ली में सशक्त नेत्री अभियान :
पंचायत राज मंत्रालय की ओर से आयोजित सशक्त पंचायत नेत्री अभियान का आयोजन किया गया। मंत्री राजीव रंजन , मंत्री अन्नपुर्णा देवी , मंत्री एस पी बघेल , मंत्री रक्षा खडसे ने हजारी लगाई। महाराष्ट्र मे दिन प्रतिदिन बिगड़ रही कानून व्यवस्था पर चर्चा करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से बैठक का आयोजन करवाया जाए ऐसी मांग जनता की ओर से उठने लगी है।
