नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

आपले सरकार सेवा केंद्रों की ओर से सेवा के बदले जनता की प्रचंड आर्थिक लूट थमने का नाम नहीं ले रही है। New India Time’s ने सरकार नाम से चलाए जा रहे आर्थिक शोषण व्यवस्था का सच सामने लाया। सजग विपक्ष के नाते समाजवादी पार्टी के रऊफ शेख ने तहसीलदार नानासाहब आगले को ज्ञापन सौंपा।प्रशासन ने 7 फरवरी को 2025 को सभी सेवा केंद्रों को एक आदेश मेल किया जिसमे निर्देशित किया गया कि केंद्र के बाहर तत्काल सरकारी रेट बोर्ड लगवाए। आपले सरकार के समन्वयक की ज़िम्मेदारी तय करी गई लेकिन मजे कि बात यह है कि समन्वयक ने खुद अपने केंद्र के बाहर बोर्ड नहीं लगाया है। समूचे महाराष्ट्र में इन केंद्रों के संचालक सत्ता पक्ष के नेता के कार्यकर्ता बताए जाते हैं।

नेताओं के संरक्षण में खुद को सरकार समझ बैठे इन ऑनलाइन सेवा केंद्रों के रसूख के आगे राजस्व प्रशासन की हैसियत इतनी गिर गई है कि केंद्र चालक अधिकारियों के आदेश को ठेंगा दिखाने की हिमाकत कर रहे हैं। या फिर प्रशासन और उनके प्यारे सरकार के बीच कोई ऐसे मधुर संबंध हैं जो सेवा केंद्रों को जनता की आर्थिक लूट करने की इजाज़त दे रहे हैं। महाराष्ट्र में हजारों आपले सरकार सेवा केंद्र हैं जिनकी परमिशन ग्रामीण इलाकों के लिए दी गई है लेकिन वो शहरों में और वो भी कचहरियों के आसपास चलाए जा रहे हैं। इस मामले में जनता जो ग्राहक है वो जब भी किसी सरकारी काम के लिए जैसे कि उत्पन्न दाखिला , क्रीमीलेयर , नॉन क्रीमीलेयर , जाती प्रमाणपत्र , निवासी प्रमाणपत्र , 7/12 जैसे किसी भी कागज़ के लिए सेवा केंद्रों पर जाए तब आपले सरकार केंद्र से सरकारी रेट बोर्ड का आग्रह करे उसके हिसाब से सेवा शुल्क अदा करे और पक्की रसीद ले।
