नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

2014 के बाद से अब तक सरकार में बने रहे मंत्रियों और उनकी सरकार की साख को महंगाई ने जनता के बीच से ख़त्म कर दिया है। बीजेपी ने प्रदेश को 8 लाख 10 हजार करोड़ रुपए के कर्ज़ मे झोंक दिया है। 100 दिन का रोड मैप इस प्रोग्राम से लोकप्रियता का बोगस प्रयास किया जा रहा है। मंत्रियों को सिर्फ पोजीशन दे रखी है सारी पावर दिल्ली में शिफ्ट कर दी गई है। नतीजा 25 जनवरी 2025 से हकीम कमेटी के सुझावों का हवाला दे कर देवेन्द्र फडणवीस सरकार ने सरकारी बस निगम मे 15% किराया बढ़ोतरी को लागू कर दिया है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर फूल टिकट वालों की जेब पर पड़ने वाला है। आपको महाराष्ट्र में सरकारी बस से कही भी जाना हो तो गंतव्य तक के दूरी को 2 से गुना कर लीजिएगा कितना किराया लगने वाला है पता चल जाएगा।
जलगांव से पुणे 450 किoमी × 2 रुपए = 900 रुपए।फर्जी वन फोर और जीरो टिकट योजना के कारण बस निगम घाटे में चल रहा है। किराए में वृद्धि को मध्य प्रदेश बिहार गुजरात की तर्ज पर बस निगम के निजीकरण के संकेत के तौर पर देखा जा सकता है। किराया बढ़ने से निजी यात्रा सेवाओं को और उनसे हफ्ता लेने वाले सरकारी परिवहन महकमे को अच्छे दिन आएंगे। महंगाई के बारे में महाराष्ट्र देश का नंबर वन राज्य बन चुका है। नेताओं द्वारा लोकल ट्रेनों बसो टैक्सी ट्राम में चलने की नौटंकी उनके भक्तो में पूजनीय हो सकती है लेकिन आम जनता के जीवन में इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। धर्म का चोला पहनकर आए पूंजीवाद ने सत्ता को हथियार बनाकर जनता के आर्थिक शोषण की ऐसी व्यवस्था बना दी है जिसे भेदना लोकतंत्र पर भरोसा रखने वाले प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य बन गया है।
