23 जनवरी 2025 को बुरहानपुर में देवी अहिल्याबाई की पुण्य गाथा नाट्य की प्रस्तुति का किया गया आयोजन | New India Times

मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

23 जनवरी 2025 को बुरहानपुर में देवी अहिल्याबाई की पुण्य गाथा नाट्य की प्रस्तुति का किया गया आयोजन | New India Times

पुण्यश्लोक लोकमाता देवी अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जन्म शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में 23 जनवरी गुरूवार 2025 को बुरहानपुर में राष्ट्रसमर्थ देवी अहिल्याबाई की पुण्यगाथा नाट्य की प्रस्तुति 45 कलाकारों द्वारा दी जावेगी। बुरहानपुर विधायक पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं प्रदेश भाजपा प्रवक्ता श्रीमती अर्चना चिटनिस दीदी ने बताया कि यह आयोजन जनजातीय लोक कला एवं बोली विकास अकादमी मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद भोपाल द्वारा आयोजित किया जा रहा है। कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर शासकीय सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय में बैठक आयोजित हुई। जिसमें कार्यक्रम के संदर्भ में विचार-विमर्श कर कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया।

बैठक को संबोधित करते हुए विधायक, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्रीमती अर्चना चिटनिस (दीदी) ने कहा कि देवी अहिल्या बाई होल्कर एक महान शासक और समाज सुधारक थीं जिन्होंने अपने राज्य में शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया। उनकी विरासत आज भी हमें प्रेरित करती है और हमें अपने समाज को बेहतर बनाने के लिए काम करने के लिए प्रोत्साहित करती है। उन्होंने कहा कि  देवी अहिल्याबाई होल्कर में भारतीय नारी का शौर्य दिखेगा। श्रीमती चिटनिस ने कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश प्रदान किए।

श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि “अहिल्या बाई होलकर की जीवनी भारत के संस्कृति की परिचायक है। जो बताता है कि भारत कि स्त्री जब आदिदेव महादेव शिव को हाथों में रख कर जब एक योद्धा बनती है तो बड़े-बड़े आक्रांता पीछे हट जाते हैं। एक शासक के तौर पर देवी अहिल्याबाई होलकर ने जिस तरह से साम्राज्य की सुरक्षा की और भारत की संस्कृति की रक्षा के साथ साथ उसका विस्तार किया। आज भारत की हर बेटी हर स्त्री को अपने अंदर की अहिल्याबाई को जगाना होगा। शिवाला के साथ-साथ अपने अंदर की शक्ति को जगाना होगा और भारत की संस्कृति का विस्तार करना होगा। मंदिरों के पुनरउद्धार के साथ-साथ जिस तरह से रानी अहिल्या ने नदियों पर घाट बनवाये, धर्मशाला बनवाये वो उनकी दूरदर्शिता का परिचायक है। उन्होंने उस समय अर्थव्यवस्था के महत्व को समझा और माहेश्वरी साड़ी के रूप बुनकरों को टेक्सटाइल इंडस्ट्री दी।

श्रीमती अर्चना चिटनिस ने कहा कि किसी भी बच्चे के लिए उसकी माँ ही प्रथम गुरु होती है और विश्व मांगल्य सभा एक संगठन के रूप में जिस तरह समाज में मातृ निर्माण का कार्य कर रही है उससे नए और संस्कारित भारत का निर्माण हो रहा है। इस अवसर पर बैठक में महापौर श्रीमती माधुरी अतुल पटेल, विश्व मांगल्य सभा की प्रदेशाध्यक्ष श्रीमती सूरज डामोर, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जयश्री ज्ञानेश्वर पाटिल, पूर्व नगर निगमाध्यक्ष श्रीमती गौरी दिनेश शर्मा, श्रीमती अनुराधा महाजन, किशोर शाह, रवि काकड़े, प्रभाकर चौधरी, मनोज अग्रवाल, रूद्रेश्वर एंडोले, शहर के गणमान्य नागरिक सहित प्रशासनिक अधिकारीगण उपस्थित रहे।

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