ब्रिटिश हुकूमत के जेलर तो नहीं, लेकिन इस आईपीएस ने कमाल कर दिया | New India Times

गणेश मौर्या, ब्यूरो चीफ, अंबेडकर नगर (यूपी), NIT:

ब्रिटिश हुकूमत के जेलर तो नहीं, लेकिन इस आईपीएस ने कमाल कर दिया | New India Times

1975 वें में हिंदी सिनेमा पर्दे पर एक फिल्म रिलीज़ हुई थी।  फिल्म का नाम शोले था। आप ने ‘शोले फिल्म में असरानी का एक  डायलॉग तो सुना होगा जो डायलॉग काफ़ी मशहूर हुआ कि हम अंग्रेज़ोंं के ज़माने के जेलर है,लेकिन हम आपको बताते चलें की मैं जिस आई पी एस का ज़िक्र कर हूं, वो जेलर तो नहीं लेकिन उसकी हनक तो पुलिस डिपार्टमेंट में तूफान मचा दी है। बिहार के दरभंगा ज़िले के रहने वाले पुलिस कप्तान केशव कुमार है इस कड़क कप्तान की नीति है ना खाऊंगा” ना खाने दूंगा” जीरो टॉलरेंस पर कम करो शून्य सहनशीलता किसी नियम या कानून के किसी भी उल्लंघन की अनुमति नहीं देता। क्योंकि कप्तान खुद ही सड़क पर निकाल कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हुए आम जनता को सुरक्षा का एहसास दिला रहे हैं। पुलिस डिपार्टमेंट में मजाल नहीं है कि कोई अब मुंह खोलकर रिश्वत मांग ले अगर रिश्वत की भनक कप्तान तक पहुंची तो बिना देर किए ही पुलिस कप्तान सजा सुना देते हैं और उनके आगे किसी की सिफारिश भी नहीं चलती जिससे कि पुलिस डिपार्टमेंट में अब रिश्वत लेने में कोई पुलिस कर्मी हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

जिन्होंने अंग्रेज़ो के ज़माने की तर्ज़ पर पुलिस कर्मियों को फिट रखने के लिए सलाह दी है लगातार कार्रवाई पर कार्रवाई देखते हुए ठंड के महीने में पूरे पुलिस के माथे पर पसीना दिख रहा है। पुलिस कप्तान के पद ग्रहण करते ही अब तक सब-इंस्पेक्टर सहित सात पर कड़ी कार्रवाई हुई है। पुलिस डिपार्टमेंट पर किसी भी दफ्तर में रिश्वत की बू नहीं आनी चाहिए जहां पुलिस पासपोर्ट वेरिफिकेशन को चढ़वा चढ़ना पड़ता था अब इस सिस्टम को पुलिस कप्तान ने दूर कर दिया है और आम जनता के लिए एक खुशखबरी है सभी थाना प्रभारियों को पुलिसिंग पेट्रोलिंग गस्त में लापरवाही ना बरतनें की सलाह दी गई है। ज़िले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात केशव कुमार  का कहना है कि पुलिस कर्मियों चुस्तदुरुस्त रखने के लिए यह ज़रूरी है। जिनके कंधे पर सुरक्षा की जिम्मेदारी हो उन्हें चुस्त रहना चाहिए और कानून व्यवस्था का पालन करवाने के साथ-साथ आम जनता के बीच मानवी चेहरा भी रखना चाहिए।

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