निहाल चौधरी, इटवा/सिद्धार्थ नगर (यूपी), NIT:

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इटवा का भवन इस तरह जर्जर है कि देखकर डर लग जाए। करीब तीन साल से भवन के ध्वस्तीकरण प्रक्रिया अभी तक पूर्ण नहीं हो सकी है। जिस प्रकार भवन की हालत दयनीय है, होना ये चाहिए कि इसे चिह्नित करते हुए चेतावनी लिखी जाए कि इधर आना खतरे से खाली नहीं है।
परंतु मजबूरी, कि इसी भवन में न केवल ओपीडी चलाई जाती है। बल्कि यहीं पर जनरल व मस्तिष्क वार्ड भी संचालित किए जा रहे हैं। ऐक्सरे की जांच के अलावा दवा का स्टोर रूम भी इसी भवन में चल रहा है। इधर ध्वस्तीकरण प्रक्रिया में तेजी आई है। डीएम व सीएमओ द्वारा निरीक्षण भी किया, मगर अभी ध्वस्तीकरण शुरू नहीं हुआ है।
प्रतिदिन आते हैं 250 मरीज
अस्पताल के पुराने भवन का निर्माण वर्ष 1989 में हुआ। वर्तमान में इसकी स्थिति ये है कि प्रथम तल से दूसरे तल की ओर जाएं तो सीढ़ी के ऊपर से प्लास्टर उखाड़ कर गिर रहा है। ईंट दिखाई दे रही हैं, कब कोई ईंट किसी के ऊपर गिर जाए, कुछ कहा नहीं जा सकता है। सीएचसी में प्रतिदिन 200 से 250 मरीज आते हैं।
यहां पर्ची काटने के अलावा छह-छह डॉक्टरों का ओपीडी चलता है। महत्वपूर्ण वार्ड यहीं पर हैं, इसीलिए मरीजों के अलावा तीमारदारी, डाक्टर व अन्य स्टाफ का आना-जाना लगा रहता है। प्रथम तल भले ही कुछ ठीक है, पर जब दूसरा तल पूरी तरह जर्जर है। वह धराशाई हुआ तो फिर प्रथम तल पर भी सुरक्षित नहीं रह सकेगा।
2019 से निष्प्रयोजन प्रक्रिया
भवन की दयनीय स्थिति को देखते हुए सबसे पहले तीन जुलाई 2019 को निष्प्रयोजन के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र भेजा गया। इसके बाद 21 अक्टूबर, 2020 और 17 नवंबर 2020 को पुनः रिमाइंडर भेजा गया। जिसके बाद पीडब्लूडी विभाग के अभियंता की टीम आई। ध्वस्तीकरण प्रस्ताव पर मुहर लगी। इसके सारी फाइल पूरी होकर लखनऊ भेजी गई, पर अभी स्वीकृति नहीं मिल सकी है।
अधीक्षक ने कहा
सीएचसी अधीक्षक डा. संदीप द्विवेदी ने कहा कि ध्वस्तीकरण प्रक्रिया करीब-करीब पूर्ण है। विकल्प तलाशे जा रहे हैं, कि जब भवन ध्वस्तीकरण हो तो फिर जरूरी स्वास्थ्य सुविधाएं कहाँ संचालित की जाए। उम्मीद है कि जल्दी बेहतर परिणाम आ जाएंगे।
