शासन से लेकर भगवान के समक्ष गुहार लगाती संविदा एवं नियमित पर्यवेक्षक, सच्चा हनुमान की शरण में, सौंपा ज्ञापन | New India Times

पंकज शर्मा, ब्यूरो चीफ, धार (म.प्र.), NIT:

शासन से लेकर भगवान के समक्ष गुहार लगाती संविदा एवं नियमित पर्यवेक्षक, सच्चा हनुमान की शरण में, सौंपा ज्ञापन | New India Times

कहते हैं कि इंसान जब सभी दूर से हताश हो जाता है, तो भी  उसे एक आशा ईश्वर से अवश्य होती हैं, ऐसा ही एक मामला धार में संविदा पर्यवेक्षकों का देखने को आया है। जहां, धार के कलेक्ट्रेट प्रांगण में स्थित सच्चा हनुमान मंदिर में संविदा पर्यवेक्षकों ने  आस्था विश्वास रखते हुए श्री सच्चा हनुमान के समक्ष एकत्रित होकर ज्ञापन भेंट किया और अपनी लंबित मांगों को शासन से पूरी करवाई जाने का निवेदन किया, जिसमें मुख्य मांगे संविदा पर्यवेक्षकों ने बिना परीक्षा लिए सिविलियन, नियमित किया जाए, सेवानिवृत्त हो रही पर्यवेक्षकों को पेंशन दी जाए, पेंशन न मिलने पर शेष जीवन यापन गुजरना मुश्किल हो जाएगा। इसी के साथ ही नियमित पर्यवेक्षकों ने भी लंबे समय से चली आ रही वेतन विसंगति दूर किए जाने एवं ग्रेड पे 2400 से 3600 किए जाने की मांग रखी।

मध्य प्रदेश स्थाई कर्मी कल्याण संघ से संबंधित प्रदेश सचिव पर्यवेक्षक संघ प्रदेश अध्यक्ष  राखी देवड़ा, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता सहायिका संघ प्रदेश अध्यक्ष रानी जायसवाल, राकेश यादव जिला अध्यक्ष, जगदीश वर्मा, संघ के संरक्षक बी आर चौहान के नेतृत्व में संविदा पर्यवेक्षकों ने  सच्चा हनुमान जी के श्री चरणों में अपना ज्ञापन रखकर शासन प्रशासन से मांग पूरी की जाने का निवेदन किया है। ज्ञापन का वाचन राखी देवड़ा द्वारा किया गया, साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ गायन किया जाकर शासन का ध्यान पर्यवेक्षकों की मांगो की ओर आकृष्ट कराने हेतु विनती की गई।

संघ के पदाधिकारियों एवं पर्यवेक्षकों ने बताया कि पूर्व में भी कई बार शासन, प्रशासन, मंत्री महोदय को भी हमारे द्वारा ज्ञापन भेंट किए गए हैं, हमें आश्वासन दिया गया है, किंतु हमारी साथी बहने एक के बाद एक सेवानिवृत्त होती जा रही है, ऐसी दशा में हम कब तक ओर कितना धैर्य रखे, क्योंकि हमारी सेवानिवृत्त बहनों की सेवा निवृत्ति के बाद उनके पास आय का स्त्रोत समाप्त हो जाता है, कुछ अंश जमा रकम भी जीवन पर्यंत नहीं चल सकती हैं, आने वाला समय वृद्धावस्था की ओर बढ़ेगा, कई बहने विधवा, परित्यक्ता है, कुछ के बच्चे भी नहीं हैं, ऐसी स्थिति में उन्हें कौन खिलेगा पिलाएगा, कौन इलाज, खुराक करेगा, भविष्य का विचार कर हम चिंतित हैं इस कारण से हम ईश्वर की शरण में एकत्रित हुई हैं और हमें शासन से आशा है कि शासन हमारे बारे में विचार करेगा और शासन द्वारा हमारी मांगे पूरी की जाएगी।

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