भोपाल में चार दिनों से चल रहे आलमी तब्लीगी इज्तिमे का दुनिया में अमन व चैन के लिए सामूहिक दुआ के साथ हुआ समापन | New India Times

अबरार अहमद खान/मुकीज खान, भोपाल (मप्र), NIT:

भोपाल में चार दिनों से चल रहे आलमी तब्लीगी इज्तिमे का दुनिया में अमन व चैन के लिए सामूहिक दुआ के साथ हुआ समापन | New India Times

भोपाल में चार दिनों से चल रहा आलमी तब्लीगी इज्तिमा का आज आखिरी दिन था। आख़िरी दिन दुनिया में अमन-चैन के लिए सामूहिक दुआ की गयी। चार दिन तक लगातार धार्मिक तकरीरें हुईं। इसमें इस्लाम में बताए पैग़ाम के मुताबिक ज़िंदगी जीने की राह लोगों को बतायी गयी। दुआ-ए-खास से पहले मौलाना साद ने जमात में निकलने वालों को खास ताकीद की। उन्होंने में कहा कि नेक राह जो बताई है, उस पर चलने वाले बनो, तो तुम्हारी हर परेशानी खत्म हो जाएगी। आपसी रिश्ते बेहतर रखें और सबके काम आएं।

भोपाल में चार दिनों से चल रहे आलमी तब्लीगी इज्तिमे का दुनिया में अमन व चैन के लिए सामूहिक दुआ के साथ हुआ समापन | New India Times

मौलाना ने कहा कि अल्लाह के नबी ने हमें जो ज़िन्दगी गुज़ारने का तरीका बताया है बस उसी तरीके पर दुनिया और आख़िरत की कामयाबी है  अल्लाह के नबी के तरीके को छोड़कर कोई भी शख़्स ना दुनिया मे कामयाब हो सकता है और ना आख़िरत में कामयाब हो सकता है। माल व दौलत, अस्बाब, कुर्सी और ओहदे, मंसब इन तमाम चीज़ों में थोड़े से वक्त के लिए कामयाबी मिल जाएगी लेकिन दीन के ज़रिए हमेशा की कामयाबी अल्लाह रब्बुल-इज़्ज़त देंगे दुनिया मे चैन और सुकून की शक्ल में और आख़िरत में हमेशा-हमेशा जन्नत की नेमतों की शक्ल में, बेवकूफ और जाहिल है वो शख्स जो दुनिया की चीज़ों में पड़कर आख़िरत को भुलाए बैठा है। भोपाल के सबसे बड़े मज़हबी समागम में करीब 33 देशों की जमातें इस बार आयीं। जिन्हें हाई सिक्योरिटी एरिया में ठहराया गया था। विदेशों से आई इन जमातों के लिए तीन लेवल पर सुरक्षा व्यवस्था की गई।

इज्तिमा कमेटी के मीडिया को-ऑर्डिनेटर डॉ. उमर हफीज ने बताया कि 3 लेवल की सिक्योरिटी में हर लेवल पर 50-50 वॉलंटियर्स तैनात रहें। इनकी ड्यूटी 8-8 घंटे की रही। ऐसे में तीन शिफ्ट (8×3 =24) में वॉलेंटियर्स ने ड्यूटी दी। उन्होंने ने कहा कि  पिछले साल की तुलना में इस बार पार्किंग की बेहतर व्यवस्था की गई थी। 300 एकड़ में फैले आयोजन स्थल पर 66 पार्किंग स्थलों का निर्माण किया गया। इनमें 60,000 चार पहिया वाहन और सवा लाख दोपहिया वाहन पार्क किए गए। इसके अलावा, एक हजार से अधिक ऑटो और 2,000 से अधिक बसों के लिए भी जगह सुनिश्चित की गई। पिछले साल 250 एकड़ में 61 पार्किंग बनाई गई थी।

इज्तिमा प्रबंधन के अनुसार, दुआ के बाद सबसे से पहले पैदल जाने वाले लोगों को निकलने दिया गया। इसके बाद इज्तिमा की सभी पार्किंगों से दो पहिया वाहन निकालने दी गई। फिर उकसे
दो घंटे बाद पार्किंग से चार पहिया वाहन निकालने की इजाजत दी गई। इसके बाद हैवी व्हीकल निकाले गए। वहीं ट्रेनों से जाने वाले यात्रियों को सीधे गाड़ियों से स्टेशन पहुंचाया गया।

इज्तिमा के लिए शासन-प्रशासन ने व्यापक स्तर पर इंतज़ाम कर रखा था  इज्तिमा स्थल पर बम डिस्पोजल स्क्वायड और डॉग स्क्वायड तैनात रहे। पूरे आयोजन के दौरान एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड की भी तैनाती रही। आप को बता दें कि भोपाल में इज्तिमे की शुरुआत 76 साल पहले नवाबी दौर में हुई थी। पहले एक मस्जिद में मौलाना मिस्कीन साहब ने इसकी नींव रखी थी। पहली बार उनके साथ 14 लोग जुटे थे। उसके बाद ताजुल मस्जिद में इसका आयोजन होने लगा। साल-दर-साल लोगों की आस्था बढ़ने लगी और इसमें शिरकत करने वालों में कई देशों के लोग भी जुड़ने लगे। शिरकत करने वालों की संख्या इतनी बढ़ी की ताजुल मस्जिद परिसर और उसके आसपास की जमीन भी कम पड़ने लगी। दस साल पहले इसे यहां से 15 किमी दूर ईंटखेड़ी स्थित घासीपुरा में शिफ्ट कर दिया गया।

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