नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

महाराष्ट्र विधानसभा सीट नंबर 19 पर मुकाबला कड़ा होता जा रहा है। बीजेपी नेता गिरीश महाजन के विरोध में तीस साल से लड़ने वाले विपक्ष द्वारा बीजेपी से NCP में आए दिलीप खोड़पे सर को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद जनता ने चुनाव अपने हाथ में ले लिया है। क्षेत्र के बड़े-बड़े कस्बों में हो रही खोड़पे सर की रैलियों में हर तबके का आम आदमी सैलाब की तरह उमड़ रहा है। बिना किसी लालसा के किसान गरीब गुरबा मजदूर अपनी जेब से सर को चंदा तक दे रहा है।

मीडिया कार्पोरेट अमीर घरानों के प्रचंड समर्थन के बाद भी कमला हैरिस चुनाव हार गई और डोनाल्ड ट्रंप अमरीका के राष्ट्रपती बन गए। इन तथ्यों के आधार पर आप जनता भारत में हो रहे विधानसभा और हो चुके लोकसभा चुनाव से तुलना कर सकते हैं। प्रदेश चुनाव में अखबारों के पन्ने बिक चुके हैं इस लिए आम जनता मीडिया बन गया है। टेक्सटाइल पार्क MIDC खेल स्टेडियम सिंचाई दवाई गरीबों की घटती कमाई पर बेबाकी से बोलने वाले खोड़पे ने वोटर्स की नब्ज़ पकड़ ली है। हर तरफ़ खोड़पे सर का बोलबाला सुनाई दे रहा है।

जामनेर निर्वाचन क्षेत्र में एक किस्म से परिवर्तन का अंडर करंट दौड़ रहा है। तीस साल से विधायक उसमे आठ साल मंत्री सातवी बार बीजेपी के प्रत्याशी गिरीश महाजन को खुद अपने प्रचार की कमान संभालना पड़ी है। प्रत्येक बड़े कस्बे में प्रचार रैलियां संवाद सम्मेलन कर रही बीजेपी को संजय गरुड़ जैसा फायर ब्रांड नेता मिलने के बाद महाजन को मिलने वाली लीड को लेकर संदेह है। संजय गरुड़ के छोटे भाई प्रवीण गरुड़ ने शेंदुर्णी में आयोजित रोहित पवार की सभा में NCP शरदचंद्र पवार के प्रती कर्तव्य परायणता की सार्वजनिक रूप से गवाही दि। महाजन के लिए अब यह चुनाव दिन प्रती दिन कठिन बनता जा रहा है।
आयोग फेल: चुनावी आचार संहिता को लागू करने को लेकर जलगांव जिले में चुनाव आयोग बुरी तरह से फेल साबित हो चुका है। दबंग राजनीतिक पार्टियों ने एम्बुलेंस को प्रचार वाहन बनाया है। लोकसभा के समय दीवारों पर उकेरे गए कमल के फूल आज भी तरोताजा है। आयोग के उड़नदस्ते आखिर कर क्या रहे हैं?
