NIT की खबर का असर:रातों-रात गिरा मटेरियल चली जेसीबी, बाउंड्रीवाल का युद्ध स्तर पर शुरू हुआ काम | New India Times

पीयूष मिश्रा / अश्वनी मिश्रा, सिवनी (मप्र), NIT;​NIT की खबर का असर:रातों-रात गिरा मटेरियल चली जेसीबी, बाउंड्रीवाल का युद्ध स्तर पर शुरू हुआ काम | New India Timesमहाकौशल प्राधिकरण योजना से बाउंड्री वाल निर्माण के नाम पर ग्राम पंचायत छपारा के द्वारा पिछले दो माह पूर्व 3 लाख 82 हजार रुपए छपारा की दो अलग अलग फर्मों को भुगतान कर दिया गया था लेकिन निर्माण स्थल पर ना तो बाउंड्री वाल का निर्माण हुआ था और ना ही मटेरियल गिराया गया था लेकिन फिर भी कमीशनबाजी के चक्कर में संबंधित दो फर्मों को भुगतान कर दिया गया था। NIT की खबर का असर:रातों-रात गिरा मटेरियल चली जेसीबी, बाउंड्रीवाल का युद्ध स्तर पर शुरू हुआ काम | New India Timesइस मामले को NIT ने प्रमुखता से 22 नवंबर दिन बुधवार 2017 को खबर प्रकाशित की थी, जिसके बाद भ्रष्टाचारियों की नींद खुली और अपने आप को बचाने के लिए बैनगंगा तट के रेस्ट हाउस और छोटे पुल घाट के पास रातों रात जेसीबी मशीन की सहायता से बाउंड्री वॉल के लिए जहां-तहां गड्ढे खोद दिए गए वही रातों रात निर्माण सामग्री भी जिसमें ईट और गिट्टी के साथ अन्य मटेरियल भी निर्माण स्थल पर गिरा दिया गया और आज सुबह से ही बाउंड्री वाल निर्माण को प्रगति पर दिखाने और अपने आप को बचाने के लिए छपारा ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव के साथ साथ उनके सलाहकार निर्माण स्थल पर डटे और युद्ध गति से बाउंड्री वाल का निर्माण कार्य चल रहा है।​NIT की खबर का असर:रातों-रात गिरा मटेरियल चली जेसीबी, बाउंड्रीवाल का युद्ध स्तर पर शुरू हुआ काम | New India Times

नहीं पहुंचे जिम्मेदार अधिकारी

महाकौशल प्राधिकरण योजना से बाउंड्री वॉल के निर्माण के नाम पर पिछले दो माह पूर्व संबंधित दो अलग-अलग फर्मों को 3 लाख 82 हजार का भुगतान कर दिया जाना समझ से परे है। आखिर दो माह पहले इतनी बड़ी रकम का भुगतान क्यों किया गया और अगर किया भी गया था तो 2 माह बाद भी निर्माण स्थल पर बाउंड्री वाल बनना तो दूर किसी प्रकार का कोई भी मटेरियल पंचायत के द्वारा नहीं गिराया गया था। कल जब इस मामले को प्रमुखता से प्रसारित किया गया तो भ्रष्टाचारियों की नींद तो खुल गई और उन्होंने रातोंरात छपारा बैनगंगा तट के छोटे पुल रेस्ट हाउस घाट के समीप मटेरियल गिराने के साथ साथ जेसीबी मशीन से जहां-तहां गड्ढे भी खुदवा दिए लेकिन इतने गंभीर मामले और भ्रष्टाचार की खबर शासन प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों के कानों तक क्यों नहीं पहुंची यह समझ से परे है क्योंकि समाचार लिखे जाने तक निर्माण स्थल पर कोई भी जिम्मेदार अधिकारी जांच के लिए नहीं पहुंचा था।

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