यवतमाल ढाकणी आश्रमशाला के छात्र की हत्या का पर्दाफाश, कातिल आया पुलिस शिकंजे में | New India Times

सैय्यद मुजीबुद्दीन, यवतमाल (महाराष्ट्र), NIT; ​यवतमाल ढाकणी आश्रमशाला के छात्र की हत्या का पर्दाफाश, कातिल आया पुलिस शिकंजे में | New India Timesमहाराष्ट्र यवतमाल जिला के ढाकणी आश्रमशाला के छात्र की हुई निर्मम हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है और हत्या के आरोप में उसी आश्रमशाला के एक छात्र को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदीप शेळके की हत्या आश्रमशाला के ही कक्षा 9वीं के एक छात्र ने की थी। उमरखेड तहसील के ढाणकी स्थित अनुदानित आश्रमशाला के कक्षा पहली के छात्र प्रदीप शेळके की 13 नवंबर 2017 को पत्थर से कुचलकर निर्मम हत्या कर दी गई थी जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी।

असल कातिल को पकडना पुलीस के सामने बडी चुनवती थी। पिछले 5 दिन से पुलिस ने दिन रात एक कर दी और आखिरकार पुलिस ने नज़दीक ही छुपे कातिल के चहेरे से नकाब हटा ही दिया। पुलिस जांच में पता चला की स्कूल के कक्षा 9वींवी के एक छात्र ने ही प्रदीप की जान ले ली थी। गत रविवार को प्रदिप और हत्यारे के बीच मजाक उड़ाने को लेकर विवाद हुआ था, इस विवाद के चलते ही हत्यारे छात्र ने एक पेशेवर कातिल की तरह बहुत ही चालाकी से प्रदीप को किसी बहाने आश्रमशाले से बाहर ले गया और प्रदीप के सर पर पत्थर से हमला किया और रस्सी से उसका गला घोंट कर उसे मौत के घाट उतार दिया।​यवतमाल ढाकणी आश्रमशाला के छात्र की हत्या का पर्दाफाश, कातिल आया पुलिस शिकंजे में | New India Timesकहते हैं ना कि कातिल कितना भी शातिर कयों ना हो आखिर वो कुछ ना कुछ सबूत ज़रूर छोड़ता ही है, इसी तरह आरोपी छात्र ने अपराध के बाद एक चिठ्ठी लिखी थी, जिस में एक फोटो लगी हुई थी और लिखा था के ये अपराध उसी ने किया है और ये सबूत पुलिस के हाथ लग गया। फिर क्या था हत्यारे ने तोते की तरह पुलिस के सामने अपने वारदात की कबूली देकर खुद को सलाखों के पीछे भेज दिया। इस सनसनीखेज़ हत्या की जांच यवतमाल ज़िला के एस.पी. एम. राजकुमार के अगुवाई में अपर पुलिस अधीक्षक अमरसिंह जाधव, यवतमाल एल.सी.बी. पथक, उमरखेड के एस.डी.ओ.पी. संजय पुज्जलवार, सह.पु.नि.देवकते, बोंडे, रंगनाथ जगताप, चव्हाण, राउत, सैय्यद साजिद, अजय डोळे, विशाल भगत, सचिन हुमने, हरीश राऊत, रूपेश पाली, नितीन इंगोले, योगेश डगवार, प्रदीप नाईकवाड़े, दिगांबर मूसळे, मोहन चाटे, नारायण पवार, गीते, भातनासे, दिगांबर पिलावन, सतीश गजभिये, अजय ढोले, सुरेंद्र वाकोडे ने अपनी ज़िम्मेदारी निभाई।

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