नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की तरह कई राज्यों में मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना शुरू कराई गई है। जलगांव जिले के सभी तहसीलों में सैकड़ों करोड़ रुपया खर्च किया जा चुका हैं। जामनेर ब्लॉक में इस योजना का गज़ब का गणित बिठाया गया है। जितना पैसा पुरानी सड़क की मरम्मत के लिए दिया गया उतना हि नई सड़क के निर्माण पर खर्च किया गया। फोटो में दो अलग अलग कार्य सुचक बोर्ड है दोनों में एक किलोमीटर डामर की सड़क का निर्माण और मरम्मत कार्य के लिए औसतन 60/70 लाख रुपए तक का खर्च किया गया है।

आखिर मरम्मत पर प्रति किलो मीटर 60/70 लाख रुपया कैसे ? खर्च हो सकता है। BNA कंस्ट्रक्शन द्वारा बनाया सामरोद शंकरपुरा रास्ता आधे मे छोड़ दिया है। राजमार्ग 44 पर बजरी गिट्टी और लाल मिट्टी बिछाकर उसके लेयर को दबा दिया है खर्च बोर्ड पर लिखा है। CM सड़क के बजाय PM सड़क योजना के काम अच्छे किए गए है। कुछ सड़को के काम बी पी पुंशी जी ने करवाए है उनकी गुणवत्ता ठीक ठाक है। GST, महंगाई ने नेताओ और उनकी राजनीत की कमीशन सिस्टम को पोसने वाले ठेकेदार लॉबी को सत्ता ने पैसा बटोरने के लिए सड़क पर खड़ा कर दिया और आम आदमी के हाथ में गरीब कल्याण अनाज योजना की बोरी को थमा दिया है। तभी तो कोई ईमानदार मंत्री बांद्रा वरली सी लिंक व्यू प्वाइंट पर 200 करोड़ का फ्लैट खरीद पा रहा है।
ग्रामीण क्षेत्रों में दिए जाने वाले इन मामूली रकम के टेंडर्स उन बड़े बड़े ठेकेदारों को सौंपा जा रहा है जो शहरों में हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट में रूचि रखते हैं। जलगांव के तीनों कैबिनेट मंत्रियों के ब्लॉक्स में किए गए मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के टेंडरिंग प्रोसेस और कार्य गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की जा रही है। अगली रिपोर्ट में हम आपको NH 753F पर बनाए जा रहे पुलों की हकीकत से अवगत कराने का प्रयास करेंगे।
