अधिकारी सांसद की नहीं सुनते, इससे बड़ी विडंबना क्या होगी?: अजय उदासीन | New India Times

मेहलक़ा इक़बाल अंसारी, ब्यूरो चीफ, बुरहानपुर (मप्र), NIT:

अधिकारी सांसद की नहीं सुनते, इससे बड़ी विडंबना क्या होगी?: अजय उदासीन | New India Times

जिले के अधिकारी, कर्मचारी भाजपा के जनप्रतिनिधियों को ज़रा भी गंभीरता से नहीं लेते। शासकीय कार्यक्रमों में बेचारों को मालाएं पहना कर उनसे लंबी लंबी बाते फेकने के बाद कौन सांसद, कौन विधायक?

उक्त आरोप लगाते हुए कांग्रेस प्रवक्ता अजय उदासीन (पार्षद) ने भाजपाई जनप्रतिनिधियों को आइना दिखाते हुए कहा कि जोश जोश में ये लोग बड़ी बड़ी घोषणाएं और बातें तो कर जाते हैं, किन्तु इन्हें अधिकारी वर्ग ज़रा भी गंभीरता से नहीं लेते। उदाहरण स्वरूप नगर के मुख्य मार्गों से लेकर गली गली तक जर्जर हालत में है।

जनता तो परेशान है ही, विपक्ष भी आंदोलन में लगा है। वही हमारे सांसद ने सड़कों की बदहाल रुप अधिकारियों को आदेश दिया कि एक सप्ताह में सभी को दुरुस्त करें। किन्तु नतीजा वही ढाक के तीन पात। अधिकारियों के कानों तक उनकी आवाज़ पहुंची ही नहीं या उन्होंने सुन कर भी अनसुना कर दिया। ऐसे हैं हमारे जनप्रतिनिधि।

पार्षद अजय उदासीन ने कहा कि जो काम इन जनप्रतिनिधियों से नहीं हो रहे उसे हम पूरा करेंगे। अधिकारियों के कानों में नगाड़े बजा कर जनता की आवाज़ पहुंचाऐंगे और नगर की सड़कों की स्थिति सुधारेंगे।

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