मो. मुजम्मिल, जुन्नारदेव/छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

जुन्नारदेव विधानसभा क्षेत्र की कोयला खदानें निरंतर बंद होते जा रही है। वहीं दूसरी और प्रस्तावित कोयला खदानों को खोलने के लिए राज्य एवं केंद्र सरकार उदासीनता दिख रही है। जिसके चलते इस आदिवासी क्षेत्र में विकराल आर्थिक स्थिति उत्पन्न हो रही है। क्षेत्र के लोग पलायन करने को मजबूर हो रहे हैं। लगभग बीते 6 दशक से “काले हीरे” की चमक से रोशन जुन्नारदेव-दमुआ एवं कन्हान क्षेत्र अब गहरे अंधकार की ओर बढ़ रहा है। इस अंधकार में अब नई रोशनी की किरण नव निर्वाचित सांसद विवेक बंटी साहू में दिखाई दे रही है। सांसद द्वारा कन्हान और पेंच एरिया के महाप्रबंधक की बैठक आयोजित कर खदानें खोलने में क्या परेशानी आ रही है ? उसके बारे में चर्चा की गई।
जानकार सूत्रों ने बताया कि कोयला खदानें चालू कराने में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा वन्य जीव पर्यावरण संरक्षण मंत्रालय की अनुमति की आवश्यकता है। इसके प्रयास नव निर्वाचित सांसद विवेक बंटी साहू करेंगे तो निश्चित ही सफलता मिलेगी। इस क्षेत्र की मोआरी और तानसी में कोयले की अपार कोयला संपदा है। इस क्षेत्र की तानसी और मोआरी भवानी कोयला खदान को समय पूर्व ही अचानक बंद कर दिए जाने के निर्णय के कारण क्षेत्र उजड़ते जा रहा है। वर्तमान में इस क्षेत्र की प्रस्तावित खदानें नारायणी, टेढ़ी इमली, भारत कॉलरी, धाऊ नार्थ हर्राडोल एवं भाखड़ा प्रोजेक्ट को यदि कोल इंडिया के द्वारा समय रहते प्रारंभ कर दिया जाता तो इस क्षेत्र का जीवनकाल और बढ़ सकता था। वहीं जिले की आर्थिक गतिविधियां बढ़ेगी। जिससे इस लोकसभा क्षेत्र कि विकास होगा।
