नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

पूरे ढाई साल बीत चुके हैं महाराष्ट्र में स्थानीय सेवा इकाइयों के आम चुनाव नहीं हो सके हैं। ओबीसी के लंबित राजनीतिक आरक्षण के कारण रुके पड़े चुनावों के लिए भाजपा नेता देवेन्द्र फडणवीस जिम्मेदार हैं। फडणवीस ने मराठा, धनगर, लिंगायत समाज के सामाजिक आरक्षण के मामलों को भाजपा के फायदे के लिए बेबुनियाद तरीके से बार बार हवा दी।
महानगर पालिका, नगर पालिका, जिला पंचायत, पंचायत समिति को मंत्रालय से चलाया जा रहा है। सूखा प्रभावित क्षेत्र में टैक्स सिस्टम को ब्याज मुक्त तथा कुछ हद तक टैक्स मुक्त करने पर शिंदे – फडणवीस सरकार ने कोई फैसला नहीं लिया। गिरीश महाजन का अपना गृह जिला जलगांव सूखे से बाहर है और महाजन बतौर मंत्री सरकार के अंदर हैं। सूखे से बाहर होने के कारण आम जनता को लोकल बॉडीज के टैक्स पर 2% ब्याज देना पड़ रहा है।
जामनेर नगर परिषद में तो गज़ब की गड़बड़ी सामने आ रही है। यहां पानी के सरकारी टैक्स भुगतान पर कोई ब्याज नहीं है लेकिन ऑनलाइन सिस्टम से पुरानी देनदारी गायब है। अगर आपने सन् 2022-2023 में पानी बिल भरकर रसीद काटी है और आप 2023-2024 , 2024-2025 इन दो साल का पानी बिल भरने निगम दफ्तर पहुंचे तो ऑनलाइन सिस्टम में आपके द्वारा 2022-2023 या उसके पहले जमा कराया गया टैक्स बकाया दिखाया जा रहा है। जिन टैक्स पेयर्स के पास तत्कालीन भुगतान की रसीद है वो पुनः भुगतान से बच गए लेकिन जिनके पास रसीद नहीं है उनकी कौन सुनेगा।
ऑनलाइन के जमाने में की जा रही इस प्रकार की कथित धांधली के पीछे क्या? कोई बड़ा घोटाला छिपा है। ये तो जामनेर जैसी छोटी सी नगर परिषद की बात है महाराष्ट्र में 22 महानगर पालिकाएं हैं, क्या? उनके भीतर भी इसी तरह की आर्थिक गड़बड़िया है। अगर होगी तो न जाने कितना पैसा बिना ब्याज के कोई फ्री में इस्तेमाल कर रहा है। सरकारी खजाने में जमा होने से चुकता यह पैसा आखिर कौन? इस्तेमाल कर रहा है इसके पीछे कोई रैकेट तो नहीं है। इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग आम लोगों की ओर से की जा रही है।
