नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

किसी कैबिनेट मंत्री के गृह निर्वाचन क्षेत्र के मतदाता होने के गर्व से गदगद आप नागरिकों का सीना और चेहरा तब सिकुड़ जाता है जब सरकारी दफ्तरों में आपके छोटे छोटे काम तीन तीन चार चार महीनों से अधर में लटकाए जाते हैं। हम बात कर रहे हैं मंत्री गिरीश महाजन के गृह नगर जामनेर की जहां सब रजिस्ट्रार (उप कोषागार) कार्यालय के कंप्यूटर को चार महीनों से रिपेयरिंग की प्रतीक्षा में एक कोने फेंक दिया गया है। अफसर के मुताबिक कंप्यूटर रिपेयर कराने के लिए उच्चतम स्तर की मीटिंग बुलाई जानी है जिसका मुहूरत नहीं निकल रहा है बस तारीख पर तारीख पड़ रही है। 19 मार्च को New India Time’s ने इस समस्या को लेकर खबर प्रकाशित की। उम्मीद थी कि मंत्री जी तत्काल संज्ञान ले कर अधिकारियों को लाइन हाजिर कर काम पर लगाते और कंप्यूटर शुरू हो जाता। लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।

शायद इस लिए प्रशासन के बड़के बाबू लोग निरंकुश हो चले है। 2012 के पहले के सूची 2, सूची 3 समेत अन्य तमाम डेटा के प्रमाणित कागज़ के लिए मारे मारे घूम रहे आम लोगों का संयम जवाब देने लगा है। नगर परिषद में जन्म मृत्यु प्रमाणपत्र टेबल के हाल तो इससे भी कई गुना खराब है। बाबा आज़म के जमाने से एक हि कारण सुनाया जा रहा है कि सर्वर डाउन है अगले हफ़्ते आओ, हम आपका काम बनाकर रखते है हम आपको कॉल करेंगे ओके। कहीं कंप्यूटर ख़राब तो कही सर्वर डाउन आखिर गिरीश महाजन के कर्मभूमि मे प्रशासन की तरफ़ से यह सब चल क्या? रहा है जो बेहद शर्मनाक और क्रोधजनक है। प्रशासन के आला अधिकारी मुंह मे गोंद दबाकर चुप बैठे है कुछ तो लोकसभा के लिए भाजपा के प्रचार मे व्यस्त है।
पूर्व सांसद से अनुरोध- जिले के पूर्व सांसद शिवसेना (UBT) के नेता उन्मेष पाटील की पहचान आम जन की मुखर आवाज़ के रूप में की जाने लगी है। महाजन के गृह निर्वाचन क्षेत्र में विपक्ष जो जनता का असली पक्ष होता है वो सिर्फ़ नाम के लिए बचा है। आम आदमी यह चाहता है कि उन्मेष पाटील इस मसले को अपनी स्टाइल में सुलझाए। भाजपा त्याग कर शिवसेना में शामिल हुए पाटील बीते महीने से निरंतर तौर पर किसानों, मज़दूरों, गरीबों शोषितों की आवाज़ बने हैं।
