नरेन्द्र कुमार, ब्यूरो चीफ़, जलगांव (महाराष्ट्र), NIT:

क्या ? कौन ? क्यों ? कहां ? कब ? What ? Who ? Why ? Were ? When ? इन पांच सवालों पर पत्रकारिता की नींव रखी गई है। इन्हीं सवालों के जवाब में वो सच सामने आता है जिससे कपड़े के भीतर का हर वो नेता नंगा मालूम पड़ता है जिसकी आत्मा मर चुकी है। जामनेर पाचोरा नैरोगेज रेलवे पुनर्विकास योजना को अमृत स्टेशन स्कीम से फूटी कौड़ी नहीं मिली। किसी सड़क छाप को हजारों करोड़ का मालिक बनाने के लिए दिन-रात मेहनत करने वाला चवन्नी पसंद पत्रकार अपने क्षेत्र के रेल विकास प्रोजेक्ट पर ख़ामोश है। 19 हज़ार करोड़ रूपया खर्च कर देश भर के 700 रेलवे स्टेशन पोर्ट में बदले जा रहे हैं। इन ठेकों के टेंडर्स के कमीशन से भारतीय जनता काग्रेस पार्टी को कितनी कमाई होगी पता नहीं। रावेर संसदीय क्षेत्र के जामनेर पाचोरा नैरोगेज रेलवे लाइन विकास मसले पर सांसद विधायक चुप हैं। नैरोगेज फेज एक के विकास के लिए 1000 करोड़ मंजूर थे बजट में केवल 300 करोड़ मिला। काम के नाम पर पुरानी पटरी उखाड़ने का काम शुरू है।

पटरी से उतरा खेल भवन- भाजपा नेता गिरिश महाजन द्वारा जामनेर में मंजूर कराए गए सरकारी खेल प्रांगण का काम भाजपा के लोकप्रियता की खाई में समा गया है। पहले राशी भुशी दरगाह टेकड़ी फिर फलोत्पादन विभाग की सरकारी ज़मीन पर संभावना तलाशते स्टेडियम को जानबूझकर रेलवे की जगह में घुसाने का प्रयास किया गया। DRM और DM दौड़े चले आए नेता गिरिश महाजन, सांसद रक्षा खडसे ने प्रशासन के साथ मिलकर ताबड़तोड बैठके की। पत्रकारों ने अखबारों में खबरों का भरपुर उत्पादन किया, रेलवे की जमीन का DPR बनाया जाने लगा। सूत्रों से पता चल रहा है कि रेलवे मंत्रालय ने खेल स्टेडियम के लिए राज्य सरकार को जमीन देने से साफ़-साफ़ मना कर दिया है। स्टेडियम के लिए मंजूर फंड किसी दुसरे काम के लिए शिफ्ट होने जा रहा है। स्टेडियम को लेकर नेताओं की ओर से जल्द से जल्द किसी ठोस नतीजे पर पहुंचा जाना आवश्यक है वरना स्टेडियम हाथ से निकल जाएगा और जनता गीताधाम पर ही गर्व करती रहेगी।
