राज्य के साम्प्रदायिक सद्भाव और भाईचारे को समाप्त करने की कोशिशों से बाज़ आयें भाजपा-आरएसएस के विधायक और शिक्षामंत्री: सीपीआई (एम) | New India Times

अशफ़ाक़ क़ायमखानी, ब्यूरो चीफ, जयपुर (राजस्थान), NIT:

राज्य के साम्प्रदायिक सद्भाव और भाईचारे को समाप्त करने की कोशिशों से बाज़ आयें भाजपा-आरएसएस के विधायक और शिक्षामंत्री: सीपीआई (एम) | New India Times

भाजपा-आरएसएस के हवामहल क्षेत्र के विधायक बालमुकुंदाचार्य द्वारा जयपुर के एक सरकारी स्कूल में घुसकर स्कूल के शिक्षकों और छात्राओं को डराने-धमकाने और अनावश्यक रूप से साम्प्रदायिक विवाद पैदा करने की घृणित कोशिश करने के कृत्य की भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की राजस्थान राज्य कमेटी और जयपुर जिला कमेटी ने कड़े शब्दों में निन्दा करते हुये भाजपा-आरएसएस के विधायक की मंशा पर सवाल खड़े किए हैं।

ज्ञातव्य हो कि यह तथाकथित बाबा विधायक अपने निर्वाचन के तुरंत बाद से लगातार विवादों में रहने के लिए कोशिश करते रहे हैं। पहले भी इन्हीं विधायक ने शपथग्रहण करने से पहले ही शहर के अल्पसंख्यक दुकानदारों को डराने-धमकाने का प्रयास किया था।

सीपीआई (एम) के राज्य सचिव का.अमराराम और जयपुर जिला सचिव डॉ.संजय”माधव” ने प्रैस-वक्तव्य जारी करते हुये भाजपा-आरएसएस सरकार के मुख्यमंत्री भजन लाल और प्रदेश के नेतृत्व से अपील की है कि वे अपने विधायकों और मंत्रियों को हिदायत दें कि अनावश्यक और विवादास्पद मुद्दों को हवा देकर राज्य का माहौल खराब करने से बाज आयें।

राज्य की जनता ने उन्हें जिस काम के लिए चुना है, उस काम पर ध्यान केंद्रित करें तो राज्य की जनता और राज्य के हित में होगा। राज्य की जनता ने मूलभूत समस्याओं का समाधान करने और जनता की सेवा करने के लिए चुना है, तो सरकार को राज्य की जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए उसी दिशा में काम करने और अनावश्यक रूप से साम्प्रदायिक सद्भाव को नुक्सान पहुंचाने वाले मुद्दों को हवा देने से बचना चाहिए।

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) का मानना है कि राज्य में महिलाओं और महिला शिक्षा की पहले से ही हालत अच्छी नहीं है, ऐसे में सरकार के मंत्रियों-विधायकों की ऐसी हरकतों और अपने संगठन विशेष की विचारधारा के आधार पर चुन-चुन कर मुद्दों को हवा देने से राज्य का माहौल खराब होगा और महिला शिक्षा को भी भारी आघात पहुंचेगा।

लोकतंत्र में चुनी हुई राज्य सरकार को किन्हीं निहित संकीर्ण राजनीतिक स्वार्थों से संचालित होने के बजाय भारतीय संविधान की भावनाओं के अनुरूप एक व्यापक, उदार और सर्वसमावेशी दृष्टिकोण के साथ काम करने की आवश्यकता है।

सीपीआई (एम) ने राज्य की जनता को सतर्क करते हुये, जनता से भी अपील की है कि वे समाज को विभाजित कर राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रही साम्प्रदायिक-जातिवादी ताकतों से सावधान रहें और उन्हें ऐसे अवसर प्रदान नहीं करें जिससे कि ये ताकतें हमारी भावनाओं को भड़काकर हमें आपस में लड़ाकर हमारे मूलभूत समस्याओं से हमारा ध्यान भटकाने में कामयाब हो पायें।

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की राज्य कमेटी ने राज्य की भाजपा-आरएसएस सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार तुरंत प्रभाव से साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की राजनीति करने वाले अपने नेताओं पर लगाम लगाये।

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