Edited by Maqsood Ali, मुंबई, NIT;
ऑनलाइन बैंकिंग करते वक्त बैंक की लापरवाही कि वजह से यदि किसी ग्राहक के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी होती है, तो उसके लिए बैंक जिम्मेदार होंगे न कि खाताधारक। यदि कोई तीसरा पक्ष भी फ्रॉड करता है तो ऐसी स्थिति में भी ग्राहक की कोई जिम्मेदारी नहीं होगी। ग्राहकों को 3 दिनों के अंदर बैंक को इसकी सूचना देनी होगी, नहीं तो खाताधारक को अधिकतम 25000 तक का नुकसान उठाना पड़ सकता है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने ग्राहकों के हित के लिए यह एक नई गाइडलाइन जारी की है, आरबीआई ने खाताधारकों के लिए कार्ड या ऑनलाइन फ्रॉड के मामले में शून्य और सीमित देयता के कॉन्सेप्ट की शुरुआत की है।
आरबीआई की ये नई गाइडलाइन उन सभी खाताधारकों के चेहरे पर मुस्कान लेकर आई है, जो ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं। आरबीआई ने गाइडलाइन जारी करते हुए सभी बैंकों को निर्देश दिए हैं कि वे सभी ग्राहकों के फोन नंबर रजिस्टर्ड करके उन्हें मैसेज अलर्ट के माध्यम से उनके लेन-देन की जानकारी दें। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपने अंतिम दिशा निर्देशों को सामने रखा है और बैंकिंग नियमों को सख्त बनाने की मांग की है। जारी निर्देशों के अनुसार बैंक को खाताधारकों के अकाउंट को मोबाइल नंबर से लिंक करने की जिम्मेदारी दी गई है। बैंक ग्राहक के अकाउंट से किए गए लेन-देन की जानकारी उन्हें फोन बैंकिंग, एसएमएस या ईमेल के जरिए भी दे सकते हैं।
