हनीफ खान, ब्यूरो चीफ, मिर्ज़ापुर (यूपी), NIT:

कहते हैं कलम की राह जब आंदोलन की राह अपना लेती है तो बड़े – बड़े तख्त पलट जाते हैं, लेकिन चंदौली पुलिस महकमें के उच्चाधिकारी पीड़ित कलमकार को न्याय दिलाने की जगह अभद्र और भ्रष्ट सिपाही को बचाने की जुगत में कोई करम बाकी रखना नहीं चाहती। यह पुलिस कप्तान साहब का दंभ ही है कि कार्रवाई का आश्वासन देने के बाद भी मामले में लीपापोती में जुट गए हैं और अब पत्रकारों पर ही दोषारोपण कर रहे हैं। विदित हो की चकिया चौराहे पर तैनात सिपाही के कृत्य का वायरल वीडियो में सहज देखा जा सकता है कि किस प्रकार शराबियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के क्रम में सरेराह डंडे और बर्बरतापूर्ण ढंग से लात – घूंसे बरसाए गए। उस दृश्य को जब पत्रकार ने कैमरे में कैद कर लिया तो सिपाही द्वारा कैमरा/मोबाइल ही छीन लिया गया। अब सवाल यह कि जब मोबाइल ही छीन लिया गया तो वह पत्रकार मोबाइल छीनने का दृश्य कैसे कैद कर पाएगा? लेकिन यह शायद डॉक्टर से आईपीएस की परीक्षा पास किए एसपी महोदय की समझ से परे रहा है। जब पत्रकारों के साथ इस तरह का रवैया उनका है तो आम जनता न्याय की क्या उम्मीद लगा सकती है।
लामबंद पत्रकारों ने किया एसपी कार्यालय का घेराव, कुर्सी छोड़ गायब मिले कप्तान
मामले में न्याय की मांग लिए धरनारत पत्रकारों एवं भारतीय मीडिया फाउंडेशन और स्वंतत्र मीडिया क्लब के सदस्यों को निराशा हाथ लगी। धरनारत पत्रकार जब एसपी से पूर्व में दिए गए पत्रक के हवाले से कार्रवाई का पुष्ट लेने आंदोलन की राह के तदर्थ पहुंची तो पहले सक्रिय एलआईयू टीम की सूचना पर कुर्सी छोड़कर पुलिस कप्तान महोदय गायब मिले और पूरे एसपी कार्यालय में सन्नाटे सा माहौल व्याप्त था, साथ ही अधीनस्थ अधिकारी भी मौके से गायब मिले। हालांकि इस दौरान पीड़ित पत्रकार से लगायत अन्य बंधुओं ने एसपी से संपर्क भी साधने की चेष्टा की लेकिन उनका फोन कवरेज क्षेत्र से बाहर ही बताता रहा। लिहाजा अब पीड़ित पत्रकार, अन्य पत्रकार बंधुओं समेत संगठन के कार्यकर्ताओं ने न्याय की आस चंदौली पुलिस कप्तान महोदय से छोड़ दी है और मामले में आगे की बड़ी रणनीति का रुख अख्तियार करते हुए आंदोलन को व्यापक रूप देने की तैयारी में जुट गई है। बड़ी असहज बात भी सामने आई की चंदौली पुलिस कप्तान सबूत, जानकारी और पत्रक देने के बाद भी कार्रवाई का मात्र आश्वासन देकर एक सीओ की पहल पर निर्णय लेते हैं, तब ऐसे में न्याय की उम्मीद भी बेमानी है।
पीड़ित पत्रकार ने बताया जानमाल को खतरा
चंदौली एसपी कार्यालय पहुंचे पत्रकारों के हुजूम के प्रदर्शन और नारेबाजी को देख कर मौके पर चंदौली सदर थाना पुलिस की टीम काफी मान मनौव्वल में तल्लीन दिखी लेकिन पत्रकारों ने कार्रवाई की अपडेट जाननी चाही तो मुकदर्शक बन खड़े हो गए। हालांकि इस दौरान पीड़ित पत्रकार ने न्याय की आस छोड़ मामले के बाबत चंदौली कप्तान के निष्पक्ष कार्रवाई के पक्षधर होने का दंभ करने के कथन को निराधार बताते हुए कहा कि जो कप्तान मामले में पत्रकारों को न्याय नहीं दिला पाता हो उससे जनता क्या न्याय की आस लगाए। कहा की पुलिस सूत्रों के तदर्थ उसके जान माल को खतरा है और परिवार भी परेशान है। यदि कोई इस तरह की घटना घटित होती है तो उसकी सारी जवाबदेही कप्तान और सीओ की होगी। इसके तदर्थ आगे लिखित सूचना प्रेषित कर दी गई है। रही बात कार्रवाई की तो कलमकार चुप्पी साधे बैठेंगे नहीं, जितना दबाव बनाया जाएगा, कार्रवाई में लीपापोती होगी आंदोलन की राह उतनी मजबूत होती जाएगी। इस दौरान भारतीय मीडिया फाउंडेशन के प्रदेश उपाध्यक्ष प्रताप चौबे ने कप्तान और सीओ से पीड़ित पत्रकार को न्याय दिलाने की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द ही चंदौली पुलिस इस मसले पर निर्णय नहीं लेती है पूरे प्रदेश में भारतीय मीडिया फाउंडेशन के सदस्य आंदोलन की राह अपनाएंगे।
वहीं मौके पर धरनारत पत्रकारों को अपना समर्थन देने पहुंचे भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष शैलेंद्र कुमार ने कहा कि लोकतंत्र में जब पत्रकार ही सुरक्षित नहीं है तो आमजन की सुरक्षा कैसे होगी। इस दौरान उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए पत्रकारों की लड़ाई में कदम से कदम मिलाकर साथ देने की घोषणा की।
इस दौरान पत्रकार विनय तिवारी, मनमोहन, राम जनम सिंह चौहान, श्रीमती तारा शुक्ला, अजीत कुमार, मनमोहन पाठक, प्रताप नारायण चौबे, सरिता डूबे, संजय विश्वकर्मा, सचिन पटेल, सुनील कुमार यादव, राजेश कुमार, डाॅ नंदलाल शर्मा, साजिद अंसारी, मनोज कुमार, आनंद उपाध्याय, निखिल श्रीवास्तव, श्याम बिहारी सिंह, ओ पी श्रीवास्तव, प्रमोद शर्मा समेत संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
