पीयूष मिश्रा, सिवनी ( मप्र ), NIT;
छपारा शासन की ग्राम विकास योजनाओं में उच्च अधिकारीयों की मिलीभगत से घटिया निर्माण कार्य करने का आरोप लगाया जा रहा है। आरोप है कि अधिकारियों के संरक्षण में कई वर्षो से बेरोक टोक ग्राम पंचायतों में होने वाले विभिन्न योजनाओं से बनने वाली कांक्रीट रोड, नाली, पुलिया, भवन, शासकीय स्टीमेट को ताक पर रखकर मनमाने ढंग से निर्माणकार्य अत्याधिक धन कमाने की लालच में कराये जा रहे है। इन गुणवत्ताविहीन कार्यो की उच्चस्तरीय शिकायत की जाती है तो अधिकारी निष्पक्ष कार्यवाही करने की बजाए शिकायत कर्ता पर राजी नामा करने का दबाब डालते हैं। जबकि अधिकारीयो को निर्माण स्थल पर हो रहे गुणवत्ताविहीन कार्यो को बन्द करवाकर शासकीय स्टीमेट से उक्त निर्माण कार्यो को करवाना चाहिये। जिससे शासन की ग्राम विकास की निर्माण कार्य योजना सही मायने मे क्रियान्वयन हो सके।
इसी तरह का एक मामला ग्राम पंचायत छपारा के कुम्हारी वार्ड में निर्माणाधीन नाली में देखने को मिला है। बताया जाता है कि पंचपरमेश्वर की राशी से व्यायामशाला से कुम्हारी वार्ड तक बनायी जा रही है। जिसमें मनमाने तरीके से घटिया किस्म का निर्माण कार्य किया जा रहा है। छपारा के उक्त वार्ड के एक नागरिक ने गुणवत्ता विहीन नाली की शिकायत जन समस्या निवारण विभाग (१८१) एवं जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी व छपारा जनपद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के व्हाटसप नम्बर पर सम्बन्धी निर्माण कार्य की फोटो सहित पोस्ट किया। बाबजूद इसके उक्त गुणवत्ताविहीन नाली का निर्माण तीन माह से चल रहा है जो लगभग ५० मीटर लम्बाई की नाली है। सीएम हेल्प लाइन में एल ४ में शिकायत पहुंचने के बाद भी सम्बंधित अधिकारीयों द्वारा सीएम हेल्पलाईन की धज्जियां उडाकर झूठा निराकरण पेश किया जा रहा है। नाली का निर्माण चल रहा है आने जाने की व्यवस्था कर दी गयी है। बार बार यही निराकरण दिया जा रहा है जिससे शिकायतकर्ता असंतुष्ट है। असंतुष्ट होने की बडी बजह है यदि कार्य जारी होता तो लगभग ५० मीटर की नाली चार माह में बन चुकी होती जबकि उक्त नाली जस की तस पडी हुयी है। अभी तक जितना कार्य हुआ है वह गुणवत्ताविहीन हुआ है। ग्राम पंचायत के द्वारा उक्त नाली मेंलोहे की छड का उपयोग नहीं किया जा रहा है और न ही बेस गिट्टी का उपयोग किया गया है जबकि शासकीय स्टीमेट में गहरी नाली निर्माण में लोहे का इस्तेमाल करना बताया जाता है। इस सम्बन्ध में तकनीकीय विभाग के एक अधिकारी से पूछा गया तो उन्होंने ने भी बताया कि लोहे की छड इस्तेमाल गहरी नाली निर्माण के स्टीमेट में होता है परन्तु उक्त नाली निर्माण में एक टुक्डा लोहा का उपयोग नही किया गया है।
उक्त विषय की जानकारी स्थानीय मुख्य कार्यपालन अधिकारी छपारा को है परन्तु अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गयी है जो कई संदेह को जन्म देता है। ऐसे यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगा की गुणवत्ताविहीन कार्यों में अधिकारीयों का संरक्षण है। क्या शासन की योजना का क्रियान्वयन निर्माण एेजेंसी के मनमाने स्टीमेट पर होगा या शासन के निर्धारित स्टीमेट पर होगा?
यदि उच्च अधिकारीयों द्वारा समय रहते ऐसे गुणवत्ताविहीन कार्यों पर अंकुश नहीं लगाया गया तो ग्राम विकास की योजनायें यूं ही प्रभावित होते रहेंगी।
