अरशद रजा,संभल (यूपी ), NIT;
मंगलवार को परिषदीय विद्यालय नगलिया कामगार में बड़ी धूम धाम से शिक्षक दिवस मनाया गया।
इस अवसर पर विद्यालय के समस्त स्टाफ ने डाॅ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। प्रधानाचार्य जगत सिंह ने गुरु के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की सफलता उनके शिक्षकों पर निर्भर करती है। इतिहास गवाह है कि जिस राष्ट्र और समाज ने शिक्षकों को सम्मान दिया उसने सफलता प्राप्त की।
शिक्षक अरशद रज़ा ने डाॅ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन परिचय पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि डाॅ. राधाकृष्णन स्वतंत्र भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति और द्वितीय राष्ट्रपति थे। उनके जन्म दिवस 5- सितम्बर को भारत में ‘शिक्षक दिवस’ के रूप में मनाया जाता है।
डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन का जन्म 5 सितम्बर, 1888 को तमिलनाडु के छोटे से गांव तिरुमनी में ब्राह्मण परिवार में हुआ था। पिता का नाम सर्वपल्ली विरास्वामी व माता सीताम्मा थी।
वह शुरू से ही एक मेधावी छात्र थे। उन्होंने दर्शन शास्त्र में एम.ए. किया था।1916 में मद्रास रेजिडेंसी कालेज में दर्शन शास्त्र के सहायक प्राध्यापक बने। तत्पश्चात वे इंग्लैंड के ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी में भारतीय दर्शन शास्त्र के शिक्षक बन गए। डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन बहुत ही ज्ञानी व विद्वान रह हैं। शिक्षा के प्रति रुझान ने उन्हें एक मजबूत व्यक्तित्व प्रदान किया था। बहुआयामी प्रतिभा के धनी होने के साथ ही वे देश की संस्कृति को प्यार करने वाले व्यक्ति भी थे।
विद्यालय के अन्य शिक्षकों नीतू कुमारी, नमिता देवी व मीनू सैनी ने डा. सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन के अन्य पहलुओं पर प्रकाश डाला।
इस अवसर पर विद्यालय में विभिन्न खेलकूद प्रतियोगिताऐ जैसे- कबड्डी, खो-खो, फुटबाल आदि भी आयोजित की गई। विद्यालय के बच्चों ने विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए।
विजेता छात्र छात्राओ को पुरूस्कार वितरण भी किया गया। इस अवसर पर ग्राम के सभी गणमान्य व्यक्ति व विद्यालय का समस्त स्टाफ मौजूद रहा।
