ज़फ़र खान, अकोट/अंकोल (महाराष्ट्र), NIT:

ठाकुर साहब अकोट शहर में कई वर्ष ट्रैफिक में कार्य रत रहे,
यह वही ठाकुर साहब थे जिन्होंने अकोट शहर के ट्रैफिक की स्मस्य को पूरी तरह से हल कर दिए थे। अकोट शहर में यह वही ठाकुर साहब थे जो सभी धर्मों का सम्मान करते नजर आते थे। यह वही ठाकुर साहब थे जो किसी भी धर्म की अर्थी हो या जनाजा कड़ी धूप हो या बारिश या कड़ाके की ठंड में चौराहे पर खाली पैर सलामी देते थे। यह वही ठाकुर साहब थे जो गरीब बच्चों की दीपावली को खुशियों से भर देते थे कपड़े मिठाई पैसों की मदद कर दिया करते थे।
यह वही ठाकुर साहब थे जो बीमारों की मदद कर दिया करते थे यह वही ठाकुर साहब थे यह वही ठाकुर साहब थे यह वही ठाकुर साहब थे।
ना जाने जिंदगी में कितने बेबस लाचार व गरीबों की मदद की वह भी बिना किसी पब्लिसिटी के बिना किसी स्वार्थ के
ठाकुर साहब की जितनी तारीफ करें कम है जितना लिखे कम है, बस यही कह सकते हैं की सभी धर्मों का सम्मान करने वाले ऐसे व्यक्ति की आत्म को शांति मिले, ऊपर वाला उनकी आत्मा को शांति दे व घर वालों को सब्र दे।
अकोट शहर में यह खबर पहुंचते ही अकोट शहर के युवाओं, बुजुर्गो व समाजसेवकों में गम का माहोल बन गया जिस किसी को भी देखो उसके चेहरे का रंग उतर हुआ दिखा, आखें नम हो गई दिल थम सा गया। हिंदू मुस्लिम सभी धर्म के लोग दौड़ कर उनकी अंतिम यात्रा में पहुंचने की कोशिश करने लगे। कुछ पहुंच गए कुछ रास्ते में रहे गए। यह नजारा देख कर एक बात तो पता चली की अच्छे व सच्चे लोग वह चाहे किसी धर्म से हों उनकी इज्जत व मर्तबा हमेशा बड़ा ही रहता है।
ठाकुर साहब के अचानक चले जाने से अकोला अकोट में गम का माहौल बना हुआ है। कहीं दिल तड़प रहा है तो कहीं आसुओं से आखें नम दिखाई दे रही हैं। हर कोई दर्द भरे आवाज से साहब को श्रद्धांजलि दे रहा है।
