रहीम शेरानी हिन्दुस्तानी, ब्यूरो चीफ, झाबुआ (मप्र), NIT:

भगवान ने हमें इस संसार में जोहरी बना कर भेजा यहाँ तरह तरह के धर्म हैं असली क्या है नकली क्या है इसकी हमें पहचान करनी है तप विधि पूर्वक करना तप गुरु की आज्ञा से करना मान सम्मान यश कीर्ति के लिये तप नहीं करना वर्तमान में भगवान जहाँ है वहां शरीर रहित है जब वे धरती पर शरीर सहित थे तो उन्होंने शरीर से कैसा काम लिया तो आज वे भगवान बने शरीर का उपयोग शुभ कार्यों में भी हो सकता है अशुभ कार्यों में भी इस शरीर से मुक्ति प्राप्त की जा सकती है एक दृष्दांत के द्वारा मुनिजी ने बताया की नाव का उपयोग एक किनारे से दूसरे किनारे तक जाने के लिये किया जाता है अगर उसका उपयोग मौज मस्ती के लिये किया जाये तो क्या मतलब वैसे ही जीवन सद गति के लिये मिला है अनंत जीव इस शरीर को प्राप्त करने बैठे है हमें कितनी पुण्यवानी से ये शरीर मिला है शरीर के प्रति ममत्व छोड़ेंगे तो ही तप आराधना कर सकेंगे अगर इसे मौज मस्ती में लगा दिया तो भव-भव भटकना पड़ेगा।

कई तपस्वी बड़ी तप आराधना में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।
सामुहिक सिद्धितप तप आराधना में आज उपवास के बाद सामुहिक पारणा आयोजन में करीब 160 तप आराधकों ने पारणा, बियासन किया।
पारणा बियासन, प्रभावना का लाभ श्रीमती वीणा देवी, सुरेशचंद्र (पप्पु भय्या), राजेश जैन (रिंकू) जेकी जैन परिवार ने लिया। प्रवचन में प्रभावना श्री अणु जिनेन्द्र कृपा मंडल द्वारा वितरित की गई। पुज्य श्री के दर्शन, वंदन को लिमडी, संजेली, रतलाम, थांदला, कल्याणपुरा, रंभापुर, अगराल,बड़वाह, टांडा कई श्री संघ से श्रावक, श्राविका पधारें। सभी के अतिथ्य सत्कार की व्यवस्था श्री संघ द्वारा श्री महावीर भवन पर की गईं।
