वी.के. त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर खीरी (यूपी), NIT:

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. लक्ष्मी कांत पाण्डेय के कुशल और सशक्त नेतृत्व में परिषदीय विद्यालय आज आधारभूत शिक्षा की अलख जगा रहे हैं। विद्यालयों का जहाँ कायाकल्प हो रहा है वहीं विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था उत्कृष्ट हुई है। आज विद्यालयों में उत्तर प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं से छात्र छात्राओं का सर्वांगीण विकास हो रहा है।
ऐसा ही जनपद के एक विद्यालय जो लखीमपुर मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर गोला मोहम्मदी रोड पर विकास क्षेत्र बेहजम में स्थित प्राथमिक विद्यालय रतसिया है। आज यह विद्यालय अपने उत्कृष्ट शिक्षण के कारण दूर दूर तक विख्यात है। चार वर्ष पूर्व यह एक सामान्य विद्यालय ही था परंतु वर्ष 2018 में उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रयोग के तौर पर इस विद्यालय को अंग्रेजी माध्यम से संचालित करने का निर्णय लिया। 6 अप्रैल 2018 को बतौर प्रधान अध्यापक प्रमोद वर्मा की इस विद्यालय में नियुक्ति हुई। प्रमोद वर्मा के साथ ही दो अन्य सहायक अध्यापकों की नियुक्ति हुई, एक सहायक अध्यापक तथा 2 शिक्षामित्र पहले से कार्यरत थे। वर्तमान में विद्यालय में एक प्रधानाध्यापक 3 सहायक अध्यापक 2 शिक्षामित्र कार्यरत हैं। वर्ष 2018 में इस विद्यालय में 70 छात्र छात्राओं का नामांकन था। स्थानीय सहयोग, विद्यालय प्रबंध समिति के सहयोग से लेकर अभिभावकों की निरंतर बैठक करना प्रारंभ किया गया है। बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। विद्यालय में उस समय चार चांद लग गए जब शासन स्तर से नामांकन के सापेक्ष विद्यालय विकास अनुदान के रूप में कम्पोजिट ग्रांट मिली, धीरे-धीरे विद्यालय प्रगति की ओर बढ़ने लगा और अभिभावकों का रुझान और आकर्षण विद्यालय के प्रति बढ़ने लगा।
विद्यालय का बाह्य और आंतरिक ढांचा मनमोहक है। विद्यालय की रंगाई, पुताई, चहारदीवारी, शौचालय, मल्टीपल हैंड वाश, आकर्षक फील्ड को सामुदायिक सहयोग लेकर बहुत बेहतर बनाया गया है और लगातार इस दिशा में प्रयास चल रहा है।
इसी अभियान के दौरान विद्यालय में बच्चों के बैठने के लिए कुंभी चीनी मिल के द्वारा बच्चों के बैठने के लिए फर्नीचर दिया गय। वर्ष 2020 में पुनः कुंभी चीनी मिल के द्वारा एक आरओ सिस्टम लगवाया गया जिससे बच्चों को शुद्ध पानी की व्यवस्था उपलब्ध हुई।

प्रधानाध्यापक प्रमोद वर्मा और समस्त स्टाफ के अथक प्रयासों के द्वारा सोशल मीडिया पर व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर अधिक से अधिक बच्चों के अभिभावकों को जोड़ा गया। कोरोना काल में ऑनलाइन कक्षाओं को प्राथमिकता दी गई। व्हाट्सएप पर निरंतर गृह कार्य दिया जाने का यह विद्यालय अपनी गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करने के लिए क्षेत्र में एक चर्चा का विषय बन गया है।
वर्तमान में छोटे बड़े मजरों को मिलाकर कुल 28 मजरे ऐसे हैं जहां दूर दूर से बच्चे पढ़ने आते हैं अत्यधिक दूरी होने के कारण अभिभावक ने अपने बच्चों को ऑटो से स्कूल में भेजते हैं।
बच्चे भी यहाँ के अपनी आयुसंगत कक्षाओं के अधिगम स्तर के ज्ञान से अधिक जानते हैं। पांचवी कक्षा के बच्चे अंग्रेजी में भी संवाद करते हैं।
हर महीने अभिभावकों के होने वाली बैठक से समुदाय के लोग अधिक से अधिक जुड़ रहे हैं और विद्यालय के साथ अभिभावक भी कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग कर रहे हैं।
आज वर्तमान में विद्यालय की छात्र संख्या 486 हो चुकी है इस प्रकार यह विद्यालय क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाये हुए हैं।
प्रधानाध्यापक प्रमोद वर्मा इसका श्रेय जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. लक्ष्मीकांत पाण्डेय के कुशल मार्गदर्शन समय समय पर संवाद और अपने समस्त स्टाफ के सदस्यों क्षमा यादव, श्याम किशोर पाण्डेय, अमिता दीक्षित, किरन भार्गव एवं बरखा अग्रवाल के परिश्रम को इसका श्रेय जाता है।

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