कबाड़ की आड़ में नेपाल से हो रही तस्करी, बॉर्डर की तमाम सुरक्षा एजेंसियों की खुली पोल

अपराध, देश, भ्रष्टाचार, राज्य

वी.के.त्रिवेदी, ब्यूरो चीफ, लखीमपुर-खीरी (यूपी), NIT:

भारत-नेपाल की खुली सैकड़ों किमी सीमा के करीब बसे कस्बों में कबाड़ के अवैध कारोबार की आड़ में तस्करी का धंधा तेजी से फलफूल रहा है। तस्कर कबाड़ में तस्करी के सामनों को छिपाकर आसानी से सरहद पार कर अपनी जेब भर रहे हैं। इन पर न तो पुलिस की खास नजर ही है और न ही सीमा सुरक्षा में लगी एजेंसियां ही कबाड़ों की ओर देखती हैं जिसका सीधा लाभ तस्कर उठा रहे हैं।
नेपाल से भारतीय क्षेत्र में किसी प्रकार के कबाड़ को वैधानिक तरीके से नहीं लाया जा सकता है क्योंकि कबाड़ लाने पर भारत सरकार ने प्रतिबंध लगा रखा है। माओवादी आन्दोलन के दौरान कई स्थानों पर स्थापित छोटे-बडे़ कारखानों का विस्फोट से उड़ा दिये जाने के कारण वहां के बेकार सामनों को किसी न किसी तरीके से तस्करों के द्वारा खरीददारी कर भारतीय सीमावर्ती क्षेत्रों में पहुंचाया जा रहा है। बिना लाइसेंस के दुकान खोलकर नेपाल के विभिन्न कस्बों से लोहा, तांबा, पीतल आदि सामान भारतीय क्षेत्र में विभिन्न चौराहों पर इकट्ठा कर रहे हैं और हर सप्ताह ट्रकों द्वारा बाहर भेजकर माला-माल हो रहे हैं। इस कार्य में कारोबारी दोनों तरफ के देशों के लोगों को एजेंट बनाकर नेपाली गावों में नेटवर्क फैलाए हैं। उन्हीं के माध्यम से नेपाल में इकट्ठे कबाड़ को पुलिसिया संरक्षण में चोर रास्तों से भारतीय सीमा में पहुंचाया जा रहा है। इस कार्य मे तस्कर लाइन मिलने के बाद रात को कबाड़ सीमा के अन्दर खुली दुकानों तक पहुंचा देते हैं। बताया जाता है कि इस कार्य में पुलिस मनचाहा सुविधा शुल्क भी वसूलती है और यह भी नहीं देखती कि कबाड़ के अन्दर क्या रखा है। इस प्रकार सीमा क्षेत्र के गौरीफंटा, बनगवां, सूंडा, चंदनचौकी, कजरिया, सुमेरनगर, कमलापुरी, बसई, खजुरिया, संपूर्णानगर आदि कस्बों मे बेखौफ कबाड़ की दूकानें अवैध रूप से संचालित हो रही हैं।
पुलिस क्षेत्राधिकारी संजय नाथ तिवारी का कहना है कि कबाडियों पर पुलिस की नजर है, इनकी सूची तैयार कर उनकी निगरानी की जा रही है। सूचना मिलने पर ऐसे कारोबारियों पर कार्यवाही कर अवैध कारोबार पर अंकुश लगाया जाएगा।

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