स्कूल फीस मुद्दे को लेकर अभिभावक उतरेंगे आंदोलन के लिए सड़कों पर

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हरकिशन भारद्वाज, जयपुर (राजस्थान), NIT:

शिक्षा मंत्री से हुई वार्ता के बाद निजी स्कूल संचालकों का धरना भले ही समाप्त हो गया हो लेकिन फीस को लेकर चल रहा विवाद अभी समाप्त नहीं हुआ है। अब अभिभावकों ने सड़क पर उतरने का ऐलान कर दिया है। संयुक्त अभिभावक संघ ने आज अपनी विभिन्न मांगों को लेकर शिक्षामंत्री के निवास स्थान के साथ ही जिला कलेक्टर को भी ज्ञापन दिया और कहा कि यदि उनकी मांगों पर उचित कार्यवाही नहीं की गई तो आगामी दो से तीन दिन में अभिभावक सड़क पर उतरने के लिए मजबूर होंगे। संघ के प्रवक्ता अभिषेक जैन और अध्यक्ष अरङ्क्षवद अग्रवाल ने कहा कि पिछले आठ माह में जनजीवन अस्तव्यस्त हो चुका है। नौकरियां जा चुकी हैं, व्यापार ठप्प हो गए जिसके कारण घर चलाना तक मुश्किल हो गया है और एेसे समय में निजी स्कूल संचालकों ने शिक्षा के मंदिर को व्यापार बना दिया। वह अभिभावकों को प्रताडि़त कर रहे हैं।

यह हैं संयुक्त अभिभावक संघ की मांगें
: कोरोना में बंद रहे निजी स्कूलों की केवल २५ फीसदी ट्यूशन फीस निर्धारित की जाए।
: सभी अतिरिक्त चार्ज जिनका उपयोग पैरेंट्स और बच्चों ने नहीं किया उन्हें समाप्त किया जाए।
: आनॅलाइन क्लास की गाइडलाइन जारी हो। फीस, समय सीमा और निगरानी तय की जाए।
: वर्ष २०१६ के एक्ट की पालना की जाए।
: हर स्कूल की सभी तरह की फीस वृद्धि पर आगामी पांच साल तक रोक लगे।
: सभी बोर्डों का सिलेबस एक समान हो।
: शिक्षा बोर्ड में होने वाले रजिस्ट्रेशन्र फीस और परीक्षा की तारीख का निर्धारण कोर्ट के निर्णय के
मुताबिक हो।
: निजी स्कूलों में ट्रांसफर सर्टिफिकेट की बाध्यता समाप्त हो।
: यदि इस वर्ष जीरो सेशन होता है तो अभिभावकों द्वारा किसी भी मद में दी गई फीस को अगले साल
समायोजित किया जाए।
: निजी स्कूलों की तर्ज पर सरकारी स्कूलों में भी पढ़ाई सुनिश्चित की जाए।
: सरकारी और आरटीई के तहत निजी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के संसाधन सरकार और स्कूल उपलब्ध करवाएं।
: निजी स्कूलों के रिजर्व, सरप्लस फंड व सरकार द्वारा दी जाने वाली सहायता को सार्वजनिक किया जाए।
: सभी निजी स्कूलों की ट्यूशन फीस का निर्धारण कुल फीस में परसेंटेज के आधार पर किया जाए।
: वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए ही स्कूल खोलने के आदेश दिए जाएं।
: जब तक कोरोना का इलाज सुनिश्चित ना हो स्कूल ना खोले जाएं।
: इन सभी मांगों की क्रियान्विति, जांच के लिए सरकार एक एजेंसी का गठन रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में करे।

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