नाबालिग से दुष्कर्म एवं हत्या मामले में विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट ने सुनाई आरोपित को फांसी की सजा

अपराध, देश, राज्य

आसिम खान, ब्यूरो चीफ, छिंदवाड़ा (मप्र), NIT:

नाबालिग से दुष्कर्म एवं हत्या मामले में विशेष न्यायालय पॉक्सो एक्ट ने आरोपित को फांसी की सजा सुनाई है। विशेष न्यायालय ने अमरवाड़ा थाना क्षेत्र के एक गांव में नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में आरोपित रितेश उर्फ रोशन धुर्वे (22) को धारा 302 के प्रकरण में मृत्युदंड की सजा सुनाई है साथ ही आइपीसी की धारा 366 में दस वर्ष का का सश्रम कारावास और दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। धारा 201 में सात वर्ष का सश्रम कारावास और दो हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है साथ ही एक अन्य सहयोगी आरोपित धनपाल उइके को आइपीसी की धारा 201 में सात वर्ष का सश्रम कारावास और दो हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। 17 नवंबर को न्यायालय ने आरोपितों को दोषी पाते हुए गुरुवार को सजा का फैसला सुनाया।

दिनांक 17 जुलाई को थाना अमरवाड़ा में सूचना प्राप्त हुई की एक छोटी बच्ची खेलते समय कहीं गुम हो गई है। पुलिस द्वारा घटना स्थल पर जाकर तस्दीक के बाद अपराध पंजीबद्ध किया गया एवं अपहृता की तलाश शुरू की गई। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक विवेक अग्रवाल के द्वारा घटना स्थल का निरीक्षण किया गया तथा मामले की शीघ्र एवं प्रभावी कार्रवाई हेतु विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन भी किया गया। तत्कालीन थाना प्रभारी शशि विश्वकर्मा के द्वारा विवेचना के दौरान लगातार पूछताछ में पुलिस को पता चला कि घटना दिनांक और समय नाबालिग के घर के समीप रहने वाले रितेश धुर्वे और धनपाल उइके अपने घर पर नहीं थे। संदेह के आधार पर आरोपितों से पूछताछ की गई। जिन्होंने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। जब बच्ची घर के बाहर खेल रही थी तो 10 रुपये का नोट दिखाकर अपने पास बुलाया और बकरी बांधने के कोठे में ले जाकर दुष्कर्म किया, जिससे उसकी मौत हो गई। बाद में शव को बोरी में भरकर माचागोरा डैम में फेंक दिया। अभियोजन के द्वारा 31 गवाहों का न्यायालय के समक्ष परीक्षण कराया गया तथा मामले में उच्च न्यायालय के निर्देश पर लॉकडाउन के दौरान विषम परिस्थितियों में न्यायालय के द्वारा मामले की गंभीरता को देखते हुए निरंतर 116 दिनों तक सुनवाई की गई।

Leave a Reply