एक नज़र वातायन यूके पर दिव्या माथुर

दुनिया, देश, समाज

शुभम राय त्रिपाठी, चित्रकूट/भोपाल (मप्र), NIT:

फ्रेडरिक पिनकॉट यूके अवॉर्ड-2014 की विजेता संस्था, वातायन-यूके को, 28 नवंबर (विलियम ब्लेक का जन्मदिन) 2003 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय (भाषाविज्ञान) के रीडर, डॉ सत्येंद्र श्रीवास्तव, द्वारा लॉन्च किया गया था और उसी दिन, ब्रिटेन के कवियों, विद्वानों, कलाकारों और मीडियाकर्मियों की उपस्थिति में, इसकी पहली गोष्ठी साउथ बैंक, रॉयल फेस्टिवल हॉल- लंदन में हुई।

उद्देश्य और लक्ष्य: लेखकों और कलाकारों के लाभ के लिए सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियाँ आयोजित करना; गैर-अंग्रेजी लेखकों को अंतर्राष्ट्रीय लेखकों के संपर्क में लाने के लिए एक स्थान प्रदान करना; लेखन को अंग्रेजी में और यदि संभव हो, तो अन्य भाषाओं में अनुवादित/ प्रकाशित करना, शांति और सद्भाव के माहौल को बढ़ावा देना। 2004 में एक वार्षिक वातायन कविता पुरस्कार स्थापित किया गया, जिसमें यूके स्थित विचारकों और विद्वानों के साथ बातचीत करने के लिए एक भारतीय लेखक को आमंत्रित किया जाना तय हुआ, भारतीय सांस्कृतिक सम्बन्ध परिषद के सौजन्य से 2003-10 के लिए हवाई किराए प्रायोजित किए। तब से हम बिना किसी वित्तीय सहायता के आगे बढ़े हैं।

वातायन पुरस्कार के विजेताओं में प्रसून जोशी, निदा फाज़ली, राजेश रेड्डी, कुंवर बेचेन, प्रोफेसर पुष्पिता अवस्थी, जावेद अख्तर, डॉ मधु चतुर्वेदी, लक्ष्मीशंकर बाजपेई, डॉ मनोज श्रीवास्तव, नरेश शांडिलिया, अनिल जोशी, वंशी महेश्वरी, विज्ञान व्रत, योगेश पटेल आदि शामिल हैं।

प्रकाशन और एल्बम: प्रवासी कवियों के तीन संकलन प्रकाशित, राधिका चोपड़ा द्वारा गाये गए प्रवासी कवियों के गीतों /गज़लों का एक एल्बम ‘वतन की ख़ुश्बू’ जारी; 2015 में आर्ट्स कॉउंसिल ऑफ़ इंग्लैंड ने दिव्या माथुर को कहानी/कविता संकलनों के सम्पादन के लिए आमंत्रित किया; परिणामस्वरूप, ‘देसी गर्ल्स: प्रवासी भारतीय लेखिकाओं की कहानियां’ और ‘वतन की ख़ुश्बू: प्रवासी कवियों की हिंदी/उर्दू/पंजाबी रचनाओं का अंग्रेज़ी में अनुवाद’ का लोकार्पण हो चुका है। दिव्या माथुर सम्पादित, ‘इक सफ़र साथ साथ: विदेश में बसी भारतीय लेखिकाओं की कहानियां’ का लोकार्पण हाउस ऑफ़ लॉर्ड्स में संपन्न हुआ; मराठी में अनुवादित एक संग्रह के अतिरिक्त वंशी माहेश्वरी के सह-सम्पादन में ‘तनाव: वातायन के बारह कवियों की कविताएं’ प्रकाशित (2004); एक नया संग्रह – It’s the way you say it (अंग्रेज़ी मुहावरे और उनके तुल्यार्थक हिन्दी मुहावरे) प्रकाशन के लिए तैयार है।

कविता पिकनिक्स: हमने स्ट्रैटफ़ोर्ड-अपॉन-एवन में शेक्सपियर के घर पर, सेंट-अल्बान्स और कीट्स हाउस-हैम्पस्टेड एवं रोमन-वेरुलेमियम आदि में कविता-पिकनिक आयोजित की हैं। वातायन ने सुदीप सेन, रूथ पडेल, इंडिया रसेल, जुट्टा ऑस्टिन, मेवलट सेलन, डॉ डायना मैवरलोन, नीरज, बालस्वरूप राही, अशोक चक्रधर, सोहन राही, अमरजीत चंदन, डॉ बुद्धनाथ मिश्रा, केशरी नाथ त्रिपाठी, सुषम बेदी समेत कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय कवियों और क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं के कवियों की मेज़बानी की है।

वातायन के संस्थापक सदस्यों में डॉ सत्येंद्र श्रीवास्तव, अनिल शर्मा जोशी, डॉ पद्मेश गुप्त, मोहन राणा, इस्माइल चुनारा । प्रबंध मंडल में मीरा मिश्रा-कौशिक, डॉ निखिल कौशिक, शिखा वार्ष्णेय, अंतरीपा ठाकुर-मुखर्जी, तिथि दानी, अरुण सभरवाल, शन्नो अग्रवाल, शुभम राय त्रिपाठी । सलाहकार सदस्य एडवर्ड क्रास्क, तितिक्षा शाह, योगेश पटेल एवं बैरोनेस श्रीला फ्लैदर वातायन यूके के संरक्षक हैं।

वातायन यूके कि संस्थापिका एवं ब्रिटेन की प्रतिष्ठित ख्याति प्राप्त लेखिका दिव्या माथुर का कहना है कि हमें प्रसन्नता है कि लॉकडाउन के उपरांत, हमारे कार्यक्रमों में दस गुना वृद्धि हुई है। वर्चुअल प्लेटफॉर्म ज़ूम पर हमारी लॉकडाउन-गोष्ठियां प्रत्येक शनिवार को शाम के 4 बजे आयोजित की जाती हैं। जिसमें वैश्विक हिंदी परिवार एवं यूके हिंदी समिति भी सहयोगी है।

वातायन यूके संगोष्ठी में विश्व भर से वक्ता और श्रोता शामिल होते हैं। वातायन विविध अंतर्राष्ट्रीय साहित्यिक संघों की सहकार्यता लिए प्रयासरत रहा है और इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, हम अंतर्राष्ट्रीय संगठन, यूके हिंदी समिति एवं वैश्विक हिंदी परिवार के सहयोग से प्रख्यात अंतर्राष्ट्रीय लेखकों के जीवन और उपलब्धियों पर आधारित कार्यक्रमों का भी आयोजन कर रहे हैं।

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