राजस्थान में अब शनिवार को बच्चों को मिलेगी बैग से छुट्टी

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हरकिशन भारद्वाज, जयपुर (राजस्थान), NIT:

राज्य में बंद चल रहे स्कूलों के बीच शिक्षा विभाग एक और नवाचार करने जा रहा है और यह नवाचार है हर शनिवार को नो बैग डे का..! मतलब बच्चे स्कूल तो आएंगे लेकिन किताब पढ़ाई से उन्हें दूर रखा जाएग, उन्हें स्कूल बैग लेकर आने की जरूरत नहीं होगी। नो बैग डे की यह योजना स्कूल शुरू होने के बाद अमल में लाई जाएगी। हालांकि गत दिनों शिक्षक सम्मान समारोह के दौरान विभाग ने इस योजना को लॉन्च कर दिया है। अतिरिक्त निदेशक प्रारंभिक शिक्षा प्रशासन की ओर से इस संबंध में निर्देश जारी किए गए हैं जिसके मुताबिक नो बैग डे में कोई पढ़ाई का काम नहीं होगा। स्कूल ख्ुालने के बाद इस दिन शिक्षक और संस्था प्रधान बच्चों को वृद्ध आश्रम लेकर जा सकेंगे, जहां बच्चे उनकी सेवा कर सकें। पैरेंट्स टीचर मीटिंग के साथ साथ विभिन्न प्रकार की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन स्कूल में किया जाएगा। बालसभा, भाषा एवं कौशल विकास एवं निरोगी राजस्थान के सूत्रों से संबंधित एक्टीविटीज करवाई जाएंगी।

इस प्रकार से होगा आयोजन
शिक्षा विभाग की ओर से जारी किए गए निर्देशों के मुताबिक कक्षा 1 से 12 तक के सभी बच्चों के पांच ग्रूप्स बनाए जाएंगे। कक्षा 1 व 2 का एक समूह, कक्षा 3 4, 5 का दूसरा समूह। कक्षा 6, 7, 8 का तीसरा और चौथा समूह कक्षा 9 और 10 का बनेगा। इसी प्रकार कक्षा 11 और 12 का पांचवां समूह बनाया जाएगा। सभी समूहों में विषय एक जैसे ही होगे। बस अंतर रहेगा उनमें होने वाली गतिविधियों व कार्य का। गतिविधियों को डिजाइन करते समय कक्षास्तर का ध्यान रखा जाएगा। कक्षा के स्तर के अनुसार ही उनमें गतिविधियां करवाई जाएंगी।
जैसे पहले शनिवार को ‘राजस्थान को पहचानो’ के नाम से गतिविधियां कक्षा स्तर के अनुसार तैयार करके करवाईं जाएगी। इसी प्रकार द्वितीय शनिवार का विषय होगा भाषा कौशल विकास हेतु अभिव्यक्ति के अवसर प्रार्थना के तुरंत बाद, तीसरे शनिवार का विषय रखा गया है ‘खेलेगा राजस्थान पढ़ेगा राजस्थान’ चौथे शनिवार को ‘मैं बनूंगा वैज्ञानिक करके दिखाना ‘ प्रमाणित करना। पांचवा शनिवार यदि महीने में आता है तोए ‘बालसभा मेरे अपनों के साथ’ नाम से कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।

यह एक्टीविटिज भी करेंगे बच्चे
स्कूल समय में विद्यार्थियों को विभिन्न सहशैक्षिक गतिविधियों में व्यस्त रखा जाएगा, इसका दायित्व शिक्षक का होगा।
पूरे विद्यालय को विभिन्न सदनों में बांटकर सदन वार प्रतियोगिता करवाना। देशभक्ति गीत, संगीत, क्विज, निबन्ध प्रतियोगिता, आशुभाषण आदि प्रतियोगिताओं में लेना होगा भाग।
खेलकूद को बढ़ावा देने के लिए खोखो, चैस, बैंडमिंडन, वॉलीबाल, बास्केटबॉल, कबड्डी इत्यादि भी प्रतियोगिताओं का होगा आयोजन।
योगाभ्यास भी करना होगा।
श्रमदान की भावना जाग्रत करने के लिए बच्चे श्रमदान भी कर सकेंगे।
बच्चों को स्वंतत्रता सेनानी, सुधारक और महान वैज्ञानिकों की फिल्में दिखाई जाएंगी।

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