राजस्थान में अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री पद पर मंडराने लगे हैं संकट के बादल, विधानसभा में बहुमत के लिये मतदान होने पर गहलोत सरकार का गिरना लगभग तय।भ

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अशफ़ाक़ कायमखानी, जयपुर (राजस्थान), NIT:

हालांकि कांग्रेस सरकार पर छाये संकट के बादलों के मध्य 14 अगस्त को राजस्थान विधानसभा का अधिवेशन आहूत करने के बावजूद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा अपने पद पर बने रहने की जिद के चलते संकट गहराता हुआ नजर आ रहा है। विधानसभा में गहलोत अगर बहुमत सिद्ध करने की कोशिश करते हैं तो उनके ऊपरी तौर पर नजर आ रहे 99 विधायकों के समर्थन में भारी पोल स्पष्ट नजर आने से लगता है कि सरकार का गिरना लगभग तय है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत खेमे के दावे के मुताबिक उनके पास बसपा को मिलाकर 107 विधायकों में से 88 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। इनके अतिरिक्त दो बीटीपी, दस निर्दलीय, एक माकपा, एक लोकदल को मिलाकर कुल 102 अधिकतम होते हैं जिनमें से एक मंत्री भंवरलाल मेघवाल अस्पताल में एडमिट हैं, एक विधायक मौजूदा विधानसभा अध्यक्ष हैं यानि 100 विधायकों का आंकड़ा बैठता है। माकपा विधायक बलवान पूनीया की स्थिति माकपा की स्टेट कमेटी के निर्णय पर निर्भर करेगी। इसके अतिरिक्त गहलोत खेमे में बैठे 12-15 विधायक ऐसे हैं जो अभी भी निर्णय ऐनवक्त पर लेने की मनोस्थिति में बताते हैं जो गहलोत विरोधी खेमे के बराबर टच में बताते हैं।

कुल मिलाकर यह है कि गहलोत खेमे द्वारा अपने समर्थक विधायकों की जैसलमेर में किलेबंदी करने व उनकी कड़ी चौकसी रखने के लिये राजस्थान पुलिस व वहां के नामी व विवादों में अनेक दफा आये गाजी फकीर के मंत्री पुत्र शाले मोहम्मद की निगरानी के बावजूद अगर बहुमत सिद्ध करने का अवसर आयेगा तो उसी समय सरकार का गिरना तय है क्योंकि 12-15 विधायक विरोध पक्ष में मतदान करके सरकार गिरा सकते हैं। वैसे लगता है कि 14 अगस्त के पहले अनेक बदलाव राजस्थान की राजनीति में आने की उम्मीद राजनीति के रणनीतिकारों द्वारा सम्भावना जताई जा रही है। 14 अगस्त आते आते या तो राजनीतिक बदलाव माननीय न्यायालय के आदेश के अनुसार आ सकता या फिर जैसलमेर में बाड़ेबंदी में बंद विधायकों की आस्था में बदलाव भी नजर आ सकता है। संकट में फंसे अशोक गहलोत उभरने के लिये अविनाश पाण्डेय सहित अनेक नेताओं से लगातार विचार विमर्श भी कर रहे हैं फिर भी बाज़ी हाथ से निकलती नजर आ रही है।

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