वाह प्रधान जी! गड्ढा नहीं, सीट नहीं,छत नहीं कागजों पर बना दिया शौचालय???

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गणेश मौर्य, ब्यूरो चीफ, अंबेडकरनगर (यूपी), NIT:

स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांव और शहरों में बनने वाले शौचालय में सरकारी धन का जमकर बंदरबांट हो रहा है।
देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट स्वच्छ भारत अभियान अब अधिकारियों के लिए दुधारू गाय बन गया है। ग्राम प्रधान, ग्राम सेक्रेटरी, विकास अधिकारी एवं अन्य अधिकारियों की मिलीभगत से शौचालय में गबन का खेल धड़ल्ले से चल रहा है। अंबेडकर नगर जिले के बेवाना थाना क्षेत्र के अंतर्गत नेनुआ पिपराही गांव में अगर शौचालयों का सत्यापन एवं जांच करा दी जाए तो बड़ा घोटाला सामने आ सकता है।
अंबेडकरनगर जनपद के अति पिछड़े इलाकों में से एक गांव नेनुआ पिपराही जहां पिछड़ी और दलित बिरादरी के लोग रहते हैं। यहां के ग्रामीणों ने बताया कि स्वच्छ भारत अभियान के तहत ग्राम प्रधान गुड्डू मौर्य ने स्वच्छ अभियान के तहत बनने वाले शौचालय में जमकर सरकारी धन का बंदरबांट किया है। ग्राम प्रधान द्वारा शौचालय तो बनवा दिए गए मगर 1 वर्ष बीत गए अभी तक सीट नहीं लगा। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान गुड्डू मौर्य और विकास अधिकारी द्वारा शौचालयों का निर्माण कागज पर दिखा कर धनराशि का गबन कर लेने का आरोप लगाया है। गांव के संतराम का कहना है कि इस गांव में जमीनी हक़ीकत यह है कि शौचालय जो बने हुए हैं वो उपयोग लायक नहीं हैं क्योंकि शौचालय के ना तो गड्ढे खुदे हैं और ना ही सीट नहीं लगी है। आज भी शौच के लिए हम ग्रामीणों को बाहर जाने को मजबूर होना पड़ रहा हैं। आलम यह है कि लाभार्थी को पता ही नहीं और कागजों पर उसके यहां शौचालय का पूर्ण रूप से निर्माण हो गया। जानकारी होने पर सन्न ग्रामीणों ने आला प्रशासनिक अधिकारियों से इसकी शिकायत की लेकिन किसी ने भी कोई कार्रवाई करना जरूरी नहीं समझा।
एक अन्य ग्रामीण का कहना है कि घर पर गड्ढा भी नहीं खुदा, मगर कागज पर निर्माण दिखा कर पैसा निकाला जा चुका है।

जाएं तो जाएं कहां?

ग्रामीणों का कहना है कि शौचालय निर्माण के नाम पर धन आहरित करा लिया गया। निर्माण हुआ नहीं और अब कहा जा रहा है कि शौच के लिए बाहर ना जाओ। आखिर हम जाएं तो जाएं कहां। एक तरफ सरकार एवं प्रशासनिक अमला गांवों को खुले में शौच मुक्त बनाने का लक्ष्य रखकर युद्ध स्तर पर कार्य का दावा कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ नेनुआ पिपराही ग्राम प्रधान गुड्डू मौर्य एवं विकास अधिकारी ही धांधली में जुटे हैं। यही हाल रहा, तो ओडीएफ गांव का लक्ष्य कैसे पूरा होगा???

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